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19 दिसंबर 2008
खेती के लिए 4 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज दिए जाएं : संसदीय समिति
कृषि संबंधी संसदीय स्थाई समिति का मानना है कि कृषि कार्य के लिए दिए जाने वाले ऋणों पर ब्याज दरें घटानी चाहिए। सरकार को इस क्षेत्र के लिए चार फीसदी की दर पर कर्ज मुहैया कराना चाहिए। अभी किसानों को खेती के लिए सात फीसदी की ब्याज दर पैसा मिलता है। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक कृषि क्षेत्र में दिए जाने वाले लंबी, मध्यम और छोटी अवधि के सार ऋणों को चार फीसदी के ब्याज दरों पर ही दिए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे पहले भी समिति ने राष्ट्रीय किसान आयोग को कृषि ऋण चार फीसदी ब्याज दर पर दिए जाने का सुझाव दिया था।हालांकि समिति के इस सुझाव पर सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस तरह से किसी खास क्षेत्र को तय ब्याज दर पर कर्ज मुहैया नहीं कराया जा सकता है। समिति के इस सुझाव पर राष्ट्रीय किसान आयोग ने भी अपनी सहमति जताई है।लेकिन सरकार के मुताबिक आयोग ने कर्ज को समय से और पर्याप्त मात्रा में वाजिब ब्याज दर पर कर्ज दिए जाने का सुझाव दिया है। सरकार ने बैंकों को कृषि क्षेत्र के लिए तीन लाख तक के कर्ज को सात फीसदी के ब्याज दर पर देने को कहा है। उधर रिपोर्ट में समिति ने केरल में छह फीसदी ब्याज पर कृषि ऋण दिए जाने का उदाहरण देते हुए कहा है कि सात फीसदी से कम ब्याज दर पर कर्ज दिए जाने के सरकार से तर्क से वह सहमत नहीं है। सरकार ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शुमार किया है। इसके तहत बैंकों को कुल कर्ज का करीब 40 फीसदी कर्ज कृषि समेत सभी प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों को देना होता है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों से सात फीसदी ब्याज पर कृषि ऋण दिलानेके लिए चार फीसदी सब्सिडी दे रही है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा आर्थिक मंदी के बावजूद केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष दौरान देश में कृषि विकास की दर करीब चार फीसदी रहने का अनुमान जताया है। (Business Bhaskar)
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