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19 दिसंबर 2008
जूट मिलों में हड़ताल से बोरियों की किल्लत,दाम 25 प्रतिशत बढ़े
कोलकाता में जूट मिल मजदूरों की हड़ताल का असर जूट बोरियों के दामों पर दिखाई देने लगा है। पिछले अठारह दिनों से हड़ताल के चलते बाजार में इसकी उपलब्धता घट गई है। इसके चलते जूट बोरियों के दाम 25 फीसदी बढ़ गए है जबकि मिलों में हड़ताल के कारण चीनी मिलों के लिए पैकेजिंग का संकट खड़ा हो गया है। कोलकाता की सभी 55 जूट मिलों में मज़दूर मंहगाई भत्ते की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं जिससे जूट मिलों में उत्पादन बंद हो गया है। इस साल एक दिसंबर को कोलकाता में ए ट्विल किस्म (खाद्यान्न की पैकिंग के लिए उपयुक्त) की जूट की बोरियों का दाम 31000 रुपये प्रति टन थे जो हड़ताल के चलते बढ़कर 3,9000 रुपये प्रति टन हो गए है। इसी अवधि में इस जूट की बोरियों के दाम दिल्ली में 32000 रुपये प्रति टन से बढ़कर 40000 रुपये प्रति टन हो गए है। इस दौरान जूट के कपड़े (हैशियन) के दाम 10 फीसदी बढ़कर 42,000 रुपए प्रति टन हो गए हैं। पश्चिम बंगाल की इन मिलों में 1.25 लाख टन प्रतिदिन उत्पादन होता था। देश में इस समय जूट उद्योग करीब 6500 करोड़ रुपय का है। इस हड़ताल के कारण बोरियों का उत्पादन बंद हो गया है। इससे चीनी मिलों के लिए बोरिया नहीं मिल पा रही हैं। इसके लिए इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन (इस्मा) ने टैक्सटाइल मंत्रालय से मांग की है कि हड़ताल को जल्द खत्म करवाने के लिए प्रयास करें या जूट की बोरियों के उपयोग की बाध्यता को खत्म करें। चीनी मिलों के लिए जूट की बोरियों में चीनी की पैकेजिंग करना अनिवार्य है। जूट मिल मजदूरों की हड़ताल को खत्म करने के लिए केंद्रीय श्रम मंत्री ऑस्कर फर्नाडिस के साथ लेबर यूनियन और मिल मालिकों की बातचीत चल रही है। फेडरेशन ऑफ चटकल मजदूर यूनियन के महासचिव देवाशीष दत्ता ने बताया कि कि 55 मिलों के 2.50 लाख मजदूर हड़ताल पर हुए हैं। जब तक मजदूरों का महंगाई भत्ता नहीं बढ़ाया जाता, हड़ताल जारी रहेगी। जूट मिलों को इस समय 300 रुपये महंगाई भत्ते के रूप में मिलते हैं जिसे वे 1400 रुपये तक करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, मजदूर सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन देने की भी मांग कर रहे है।गौरतलब है कि इस चालू सीजन के दौरान कमोबेश सभी मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में इनकी पैंकिग को लेकर जूट की बोरियों की मांग बढ़ सकती है। पिछले दिनों की हड़ताल की वजह से पहले से ही इनकी कीमतों में बढ़त हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में जूट बोरियों की कीमतों में और बढ़त देखी जा सकती है। पिछले एक महीने से उत्तरप्रदेश, बिहार और पंजाब में आलू की भी फसल तैयार हो चुकी है। आने वाले महीनों में इन इलाकों में आलू की पैंकिग के लिए भी जूट की बोरियों की मांग बढ़ सकती है। जिंसों की पैंकिग महंगा होने से कारोबारियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। (Business Bhaskar)
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