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06 अक्टूबर 2008
महाराष्ट्र की चीनी मिलों पर सख्त हुआ MPCB
मुंबई : भारत के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की चीनी मिलों को प्रदूषण कम करने के लिए जल्द ही आधुनिक उपकरण लगाने होंगे। उन्हें राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों पर भी सौ फीसदी खरा उतरना होगा। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'इस समय एक टन चीनी तैयार करने की प्रक्रिया में चीनी मिलें 400 लीटर प्रदूषण फैलाती हैं। आधुनिक तकनीक को अपनाने के बाद प्रदूषण का यह स्तर घटकर 100 लीटर प्रति टन पर आ जाएगा।' महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जागरूकता बढ़ाने के लिए वर्कशॉप की एक श्रृंखला भी चलाई। इसमें 160 चीनी मिलों के मैनेजिंग डायरेक्टर, पर्यावरण और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस वर्कशॉप का आयोजन नासिक, औरंगाबाद, पुणे और सांगली में किया गया। इस मौके पर एमपीसीबी के अधिकारियों ने कहा कि चीनी उद्योग राज्य के को-ऑपरेटिव सेक्टर की रीढ़ है, इसलिए बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए तय मानकों का पालन किया जाना बेहद जरूरी है। अधिकारियों ने बताया, 'राज्य की चीनी मिलें बड़ी मात्रा में पानी को प्रदूषित करती हैं। हमने फैसला किया है इस प्रदूषित पानी का शुद्धीकरण कर इसका उपयोग सिंचाई में किया जाएगा।' वर्कशॉप में एमपीसीबी के अधिकारियों ने कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र में स्थित न्यू महेश शुगर मिल में आधुनिक तकनीक लगाई गई है। इसकी मदद से यह चीनी मिल अब पूरी तरह से इको-फ्रेंडली हो गई है। अधिकारियों ने कहा, 'न्यू महेश शुगर मिल द्वारा अपनाई गई तकनीक से तेल और ग्रीस से होने वाले प्रदूषण की दर आधी से भी कम हो गई है।' अधिकारियों ने कहा कि बोर्ड ने अगले महीने भी इसी तरह की वर्कशॉप आयोजन करने का फैसला किया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा चीनी मिल मालिक इस आधुनिक तकनीक को अपना सकें। उन्होंने कहा कि इसके अलावा डिसटिलरीज इकाइयों के लिए भी वर्कशॉप आयोजित किए जाएंगे। (ET Hindi)
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