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06 अक्टूबर 2008
चावल की रिकॉर्ड खरीद से सरकार को राहत
नई दिल्ली: फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) 2008-09 के चालू खरीद सीजन के पहले पांच दिन में ही सात लाख टन चावल खरीद चुकी है। इस चावल का इस्तेमाल देश के बफर स्टॉक, पीडीएस और जनकल्याण जरूरतों में होगा। इससे अलग, 07-08 के खरीद सीजन में 2.84 करोड़ टन चावल की रिकॉर्ड खरीद हो चुकी है। सितंबर, 08 में खरीद सीजन खत्म होने तक लक्ष्य से आठ लाख टन ज्यादा चावल खरीदा जा चुका था, जबकि इस सीजन में 2.76 करोड़ टन चावल की खरीद का लक्ष्य था। इस तरह 07-08 के सीजन में गेहूं और चावल मिलाकर कुल 5.01 करोड़ टन खाद्यान्न खरीदा गया है। यह खरीद उम्मीद से अच्छी-खासी ज्यादा है। इससे यूपीए सरकार को राहत मिलनी चाहिए। इससे चावल का सरकारी खरीद मूल्य गेहूं के बराबर 1000 रुपए प्रति क्विंटल करने का दबाव भी हल्का होगा। सरकार इस वक्त न्यूनतम बोनस (मिनिमम बोनस) देने पर विचार कर रही है। इस साल 24 लाख हेक्टेयर से ज्यादा खाद्यान्न की पैदावार वाली जमीन के बाढ़ से बर्बाद होने की वजह से वह इस प्रस्ताव पर शिद्दत से विचार कर रही है। उसके न्यूनतम बोनस देने के फैसले से दाल, खाद्य तेल और चावल एवं गेहूं को छोड़कर दूसरे खाद्यान्नों की कीमतें बढ़ सकती हैं। यूपीए सरकार उपभोक्ताओं को सस्ता चावल मुहैया कराने के लिए बफर भंडार को भरे रखना चाहती है। दरअसल, वह थोक मूल्य सूचकांक 12 फीसदी से नीचे जाने से मिली राहत को खोना नहीं चाह रही है। पिछले तीन महीने में पहली बार 20 सितंबर तक के सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक का आंकड़ा 12 फीसदी से नीचे आया है, जिसकी वजह से इस समय आम इस्तेमाल के कई खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी दिखाई दे रही है, लेकिन साथ ही, उसे अपनी किसान समर्थक छवि की भी चिंता है। इस सूरत में वह चावल बोनस (पैडी बोनस) पर होने वाले खर्च को कम से कम रखना चाहती है। इस वक्त औसत क्वालिटी चावल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 850 रुपए और 'ए' क्वालिटी चावल का 880 रुपए प्रति क्विंटल है। चावल के लिए मिल रहा न्यूनतम समर्थन मूल्य 08-09 के खरीफ सीजन में अनुमानित वेटेड औसत सी 2 कीमतों (कॉस्ट) से 37 फीसदी से ज्यादा है। चावल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मामूली इजाफा मंडियों में चावल की सप्लाई को आसान करेगा। एक बार चावल का बफर भंडार अच्छी तरह तैयार हो जाए, फिर सरकार चावल के निर्यात पर लगी पाबंदी हटा देगी। पिछले साल अक्टूबर, 07 में चावल की खरीद को लेकर लोगों को काफी संदेह था। उस वक्त लग रहा था कि सरकार 08 के सितंबर में खरीद सीजन खत्म होने तक 2.5 करोड़ टन से ज्यादा चावल नहीं खरीद पाएगी। साल 08-09 के लिए पीडीएस के तहत चावल का आवंटन लगभग 2.35 करोड़ टन था। उससे अलग जनकल्याण के कार्यक्रमों के लिए ३७ लाख टन चावल का आवंटन हुआ था। इस तरह इन कामों के लिए सरकार को 2.72 करोड़ टन चावल की जरूरत है, जबकि उसके पास 2.84 करोड़ टन चावल है। तमाम राज्य सरकारों ने एपीएल (अबव पॉवटीर् लाइन) उपभोक्ताओं के लिए चावल का आवंटन बढ़ाने की मांग की है। ऐसी भी बात कही जा रही हैं कि कुछ राज्य गेहूं को छोड़ वापस चावल का आवंटन बढ़ाने की मांग कर सकती हैं। दरअसल, पहले चावल की कमी की वजह से उन्हें चावल की जगह गेहूं का आवंटन किया जाने लगा था। अब वह दोबारा चावल मांग सकती हैं। (ET Hindi)
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