नई
दिल्ली। बढ़ी हुई कीमतों के कारण चालू खरीफ में देशभर के राज्यों में कपास
की बुआई में बढ़ोतरी का अनुमान तो है, लेकिन शुरूआती चरण में प्रमुख
उत्पादक राज्यों में इसकी बुआई 17.96 फीसदी घटकर केवल 10.73 लाख हेक्टेयर
में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में 13.08 लाख
हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।
उत्तर भारत के प्रमुख कपास उत्पादक
राज्यों हरियाणा में कपास की बुआई अभी तक 5.90 लाख हेक्टेयर में, पंजाब में
2.31 लाख हेक्टेयर में और राजस्थान में 1.54 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई
है। जानकारों के अनुसार इन राज्यों में कपास की बुआई का उपयुक्त समय 15 मई
तक होता है तथा किसान 20 से 25 मई तक बुआई करते हैं। चालू सीजन में नहरों
में पानी समय से नहीं छोड़ा गया, जिस कारण किसान कपास की बुआई नहीं कर
पाये। कर्नाटक में चालू खरीफ में कपास की बुआई 0.72 लाख हेक्टेयर में हुइ
है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन फसलों की बुआई 3 जून
तक देशभर में 69.15 लाख हेक्टयेर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान
अविध के 70.09 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
दालों की बुआई चालू खरीफ
में 1.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के
0.81 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। खरीफ की प्रमुख दलहन अरहर की बुआई चार
हजार हेक्टेयर में, उड़द की 22 हजार हेक्टेयर में और मूंग की 28 हजार
हेक्टेयर में तथा अन्य दालों की 54 हजार हेकटेयर में हुई है।
मोटे
अनाजों की बुआई चालू खरीफ में शुरूआती चरण में घटकर 1.70 लाख हेक्टेयर में
ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में 1.82 लाख हेक्टेयर में हो
चुकी थी। खरीफ मक्का की बुआई 1.53 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल
की समान अवधि के 1.60 लाख हेक्टेयर से कम है।
तिलहनी फसलों की बुआई 37 हजार हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के बराबर ही है।
गन्ने
की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 46.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि
पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई केवल 45.81 लाख हेक्टेयर में ही हुई
थी।
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