नई दिल्ली।
उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है, तथा उत्पादक
मंडियों में नए जौ की कीमतें काफी तेज हैं। राजस्थान की मंडियों में नया जौ
2,700 से 2,900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रहा है, जबकि चालू रबी
विपणन सीजन के लिए केंद्र सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी से
1,635 रुपये प्रति क्विंटल है।
जानकारों के अनुसार आगामी दिनों में
उत्पादक मंडियों में नए जौ की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे
मौजूदा कीमतों में हल्की गिरावट तो आ सकती है, लेकिन ज्यादा मंदे की
उम्मीद नहीं है। जानकारों के अनुसार रूस और यूक्रेन की जंग लंबी चली तो जौ
की कीमतों में आगे तेजी की ही उम्मीद है।
यूक्रेन और रूस जौ के
सबसे बड़े निर्यातक देशों में है। यूक्रेन की जौ के निर्यात में हिस्सेदारी
जहां दुनिया में 17 फीसदी है, वहीं रूस की हिस्सेदारी भी 14 फ़ीसदी है।
भारतीय माल्ट कंपनियां यूक्रेन से बड़े पैमाने पर जौ का आयात करती है,
लेकिन इन देशों के बीच चल रही जंग के कारण घरेलू मंडियो में जौ की कीमतें
पिछले साल की तुलना में 60 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी है। कारोबारियों का
मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने से
आने वाले दिनों में जौ की कीमतों में और भी 10 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हो
सकती है।
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी
में जौ का उत्पादन 190 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका
उत्पादन 166 लाख टन का हुआ था। जानकारों के अनुसार चालू रबी में राजस्थान,
हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जौ के बजाए किसानों ने सरसों की बुआई की थी,
इसलिए जौ का उत्पादन मंत्रालय के अनुमान से कम होगा, जबकि उत्पादक राज्यों
में बकाया स्टॉक भी लगभग नहीं के बराबर है।
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