नई
दिल्ली। प्रतिकूल मौसम के साथ ही पिंक बालवर्म की मार चालू सीजन में कपास
की फसल पर पड़ी थी, जिस कारण इसके उत्पादन अनुमान में उद्योग ने एक बार फिर
कटौती कर दी। उद्योग के अनुसार पहली अक्टूबर 2021 से शुरू हुए चालू फसल
सीजन में कॉटन का उत्पादक घटकर 335.13 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो ही होने
का अनुमान है, जबकि इसके पहले 343.13 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान जारी
किया था।
कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया, सीएआई के अनुसार कॉटन के दूसरे
आरंभिक अनुमान मेें और 8 लाख गांठ की कमी आने की आशंका है। प्रमुख उत्पादक
राज्य गुजरात में दो लाख गांठ, महाराष्ट्र में 1.50 लाख गांठ, मध्य प्रदेश
में 50 हजार गांठ, तेलंगाना में 2 लाख गांठ, आंध्रप्रदेश में 50 हजार गांठ,
कर्नाटक में एक लाख गांठ तथा ओडिशा में 50 हजार गांठ कम होने का अनुमान
है।
उद्योग के अनुसार चालू फसल सीजन में कॉटन की खपत करीब 340 लाख
गांठ होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 335 लाख गांठ की खपत हुई थी। मार्च
अंत तक 175 लाख गांठ की खपत हो चुकी है।
चालू फसल सीजन में कॉटन
का आयात बढ़कर 15 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि पिछले फसल सीजन में 10
लाख गांठ का आयात हुआ था। चालू फसल सीजन में 31 मार्च तक करीब 6 लाख गांठ
कॉटन का आयात हो चुका है।
उद्योग के अनुसार चालू फसल सीजन में कॉटन
का निर्यात 45 लाख गांठ का होने का अनुमान है, जिसमें से मार्च अंत तक 35
लाख गांठ का निर्यात हो भी चुका है।
सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन
2021-22 में पहली अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक देशभर की मंडियों में
262.68 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी है, जोकि कुल उत्पादन का करीब 80
फीसदी है। अत: उत्पादक राज्यों में अब केवल 20 फीसदी कपास ही बची हुई है,
जबकि नई फसल की आवक अगस्त, सितंबर में बनेगी।
उद्योग के अनुसार
मिलों के पास मार्च के अंत में करीब 75 लाख गांठ कॉटन का स्टॉक बचा हुआ है,
जोकि औसतन मिलों की खपत का करीब 81 दिनों का है। उधर कॉटन कारर्पोरेशन आफ
इंडिया, सीसीआई, महाराष्ट्र फैडरेशन, एमएनसी, जिनर्स, व्यापारी और एमसीएक्स
के पास मार्च अंत में कॉटन का करीब 58.68 लाख गांठ का बकाया स्टॉक है। ऐसे
में माना जा रहा है कि सीजन के अंत में 30 सितंबर 2022 को कॉटन का बकाया
स्टॉक 40.13 लाख गांठ का बचेगा।
व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार
में हाल ही में जिस अनुपात में कॉटन के दाम तेज हुए हैं, उसके आधार पर
यार्न की कीमतें नहीं बढ़ पाई। यार्न में घरेलू एवं निर्यात मांग सामान्य
की तुलना में कमजोर है। इसलिए स्पिनिंग मिलों को मौजूदा भाव पर कॉटन की
खरीद करने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में स्पिनिंग मिलें केवल जरुरत
के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही है। हालांकि जिनर्स भी दाम घटाकर
गांठों की बिकवाली नहीं कर रह हैं, इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों
में हल्की नरमी तो आ सकती है लेकिन अभी बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।
गुजरात
की मंडियों में ए ग्रेड कॉटन के दाम 92,000 से 93,000 रुपये, बी ग्रेड
किस्म की कॉटन के भाव 91,000 से 92,000 रुपये और एवरेज ग्रेड की कॉटन के
भाव 90,000 से 91,000 रुपये प्रति कैंडी क्वालिटीनुसार बोले गए।
आईसीई
कॉटन वायदा की कीमतों में शुक्रवार को दूसरे दिन मिलाजुला रुख रहा। आईसीई
कॉटन के मई वायदा अनुबंध में 79 प्वाइंट की गिरावट आकर भाव 132.41 सेंट पर
बंद हुए। जुलाई वायदा अनुबंध में 34 प्वांइट की गिरावट आकर भाव 131.06 सेंट
रह गए, जबकि दिसंबर वायदा अनुबंध में दाम 79 प्वांइट सुधरकर भाव 115.48
सेंट हो गए।
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