नई
दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से कॉटन की कीमतें 200 से
300 रुपये प्रति कैंडी तेज हो गई। उधर विदेश में आईसीई कॉटन वायदा में
इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में इसके दाम तेज होने से घरेलू बाजार में भाव को
तेजी मिली है तथा उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवक सामान्य की तुलना
में कम हो रही है। इसलिए घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतोंं में आगामी दिनों
में और भी तेजी आने की उम्मीद है।
पंजाब में कॉटन के हाजिर डिलवरी
के भाव बढ़कर 67,170 से 67,650 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो
गए। हरियाणा में कॉटन के हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 65,740 से 66,690
रुपये प्रति कैंडी बोले गए। ऊपरी राजस्थान में हाजिर डिलीवरी कॉटन के दाम
तेज होकर 66,980 से 67,650 रुपये प्रति कैंडी हो गए।
महारष्ट्र के
नागपुर लाईन की मंडियों में 30 एमएम कॉटन के भाव बढ़कर 73,500 से 74,000
रुपये और 29 प्लस एमएम की कॉटन के दाम बढ़कर 72,000 से 73,000 रुपये प्रति
कैंडी हो गए। अकोला जोन में 29एमएम किस्म की कॉटन के भाव बढ़कर 71,000 से
71,600 रुपये प्रति कैंडी हो गए।
चालू सीजन में देश के कई राज्यों
में कपास की फसल को नुकसान हुआ है, साथ ही नई फसल की आवकों के समय बकाया
स्टॉक भी पिछले साल की तुलना में कम होने के कारण कुल उपलब्धता पिछले साल
की तुलना में कम बैठेगी। अत: मिलों के पास कॉटन का स्टॉक केवल 55 से 60
दिनों का ही हुआ है, जबकि पिछले साल इस समय तक मिलों के पास 85 से 90 दिनों
का स्टॉक था। उद्योग ने चालू सीजन में कॉटन का उत्पादन अनुमान 360.13 लाख
गांठ, एक गांठ 170 किलो होने का लगाया है जबकि जानकारों का मानना है कि
उत्पादन 320-330 लाख गांठ होने की उम्मीद है। उधर विदेशी बाजार में कॉटन का
बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम रहेगा, इसलिए घरेलू बाजार में कॉटन
की कीमतों में मंदा आने के आसार तो नहीं है लेकिन कोरोना के नए वेरिएंट को
लेकर जिस तरह से राज्य सरकारें सख्ती बरत रही है। उस पर भी व्यापारियों की
नजर रहेगी।
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