नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य सरकार गन्ना किसानों को नाराज नहीं करना चाहती, इसलिए पहली अक्टूबर 2021 से शुरू होने वाले चालू पेराई सीजन 2021-22 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य, यानी एसएपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की तैयारी है। मालूम हो कि राज्य में पिछले चार साल से गन्ने का एसएपी में बढ़ोतरी नहीं गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने चार साल पहले गन्ने के एसएपी में 10 रुपये की बढ़ोत्तरी की थी लेकिन उसके बाद गन्ना दाम परामर्श कमेटी ने भी राज्य में गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल करने का सुझाव दिया था लेकिन राज्य सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था। राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए अब राज्य सरकार इसमें 25 रुपये की बढ़कर पेराई सीजन 2021-22 के लिए गन्ने का एसएपी 350 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की तैयारी कर रही है। हालांकि यह भाव पंजाब और हरियाणा के एसएपी से कम होगा।
मालूम होकि केंद्र सरकार ने अक्टूबर, 2021 से शुरू होने वाले अगले सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी (एफआरपी) मूल्य पांच रुपये बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।
सूत्रों के अनुसार गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने गन्ना मूल्य निर्धारण की जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं तथा इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हरी झंडी मिलने का इंतजार है। इसके साथ ही गन्ना मूल्य बढ़ाने का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संभव है कि सीएम योगी खुद किसानों के किसी बड़े कार्यक्रम में गन्ना मूल्य की घोषणा करें।
केंद्र सरकार गन्ने का एफआरपी तय करती है जबकि उत्तर भारत के राज्य अपने यहां की मिलों के लिए एसएपी करते हैं जो आमतौर पर एफआरपी से ज्यादा होता है। उस राज्य की मिलों को एसएपी की दर से गन्ने का भुगतान किसानों को करना होता है।
पिछले पेराई सीजन में भी उत्तर प्रदेश की मिलें किसानों से गन्ना खरीदकर पर्ची जारी करती रहीं थी, जिस पर राज्य सरकार द्वारा घोषित मूल्य दिए जाने का उल्लेख होता था। गन्ना पेराई सीजन समाप्ति पर यानी फरवरी 2021 में पिछली दर से ही राज्य सरकार ने किसानों को गन्ना मूल्य दिए जाने का आदेश दिया था। पिछले साल गन्ने की अगैती फसल का एसएपी 325 रुपये और सामान्य गन्ने का एसएपी 315 रुपये प्रति क्विंटल था।
अगले साल उत्तर प्रदेश में राज्य विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जबकि किसान तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले साल से ही आंदोलन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में गन्ने की ज्यादा खेती होती है। इसलिए आंदोलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान, खास तौर पर गन्ना किसान भी बड़ी संख्या में शामिल है।
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