नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण सोमवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित चना के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।
केंद्र सरकार द्वारा दालों पर स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बाद दलहन की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों से स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने को भी कहा गया है।
तंजानिया लाईन के चना के भाव में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 4,350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, क्योंकि नेफेड विभिन्न राज्यों में खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।
दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा और कांडला बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलिया लाईन के मसूर के दाम मुंबई में 50 से 75 रुपये प्रति क्विंटल घट गए। हालांकि, वर्तमान में आयात हुई मसूर के दाम तेज हैं, जबकि पहले से आयातित मसूर के दाम नीचे हैं। ऐसे में नीचे दाम पर मसूर की कीमतों में सुधार बन सकता है।
व्यापारियों को आयात होने वाली उड़द और अरहर को लेकर डर है, क्योंकि बड़ी मात्रा में उड़द और अरहर, बर्मा से भारत के बीच रास्ते में है।
दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण बर्मा लाईन की लेमन अरहर, नई के साथ ही पुरानी की कीमतें क्रमशः 5,900 रुपये और 5,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही। अरुषा अरहर के भाव भी 5,800 से 5,850 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
विदेश से चेन्नई में लगातार आवक बनने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमशः 6,100 रुपये और 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
रूस और सूडान लाईन के काबुली चना के भाव क्रमश: 4,850 रुपये और 5,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि काबूली चना के आयात पर 40 फीसदी आयात शुल्क है, जिस कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।
नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 5 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसके भाव में 7 रुपये का सुधार आया।
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