नई दिल्ली। निजामाबाद में सैकड़ों हल्दी किसानों ने सरकार ने हल्का का 15,000 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसी तय करने की मांग की।
चालू फसल विपणन सीजन शुरू होने से कुछ हफ्तों पहले हल्दी की कीमतें 5,500-6,000 रुपये प्रति क्विंटल थी, जोकि घटकर अब 4,000-5,000 रुपये प्रति क्विंटल (क्वालिटीनुसार) रह गई हैं, जोकि उत्पादन लागत 7,500 रुपये प्रति क्विंटल से काफी नीचे हैं। इसलिए नाराज, किसानों ने सरकार से 15,000 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग के लिए एक संयुक्त कार्रवाई समिति बनाई है।
हल्दी उगाने के लिए किसान लगभग 1.50 लाख रुपये प्रति एकड़ खर्च करते हैं। औसतन, उन्हें लगभग 20 क्विंटल हल्दी का उत्पादक एक एकड़ से मिलता है। तेलंगाना भारत की कुल 4.20 लाख एकड़ में से एक-चौथाई हल्दी का उत्पादन करता है, जो देश के एक-चौथाई 11 लाख टन से अधिक का उत्पादन करता है।
हल्दी किसानों की संयुक्त कार्रवाई समिति के एक नेता अनवेश रेड्डी ने कहा कि मार्केटिंग सीजन शुरू होते ही कीमतों में गिरावट आ गई तथा हल्दी के भाव घटकर 4,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। ऐसे में सरकार को किसानों की पारिश्रमिक आय सुनिश्चित करने के लिए 15,000 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी में हस्तक्षेप करना चाहिए और जल्दी इसकी घोषणा करनी चाहिए।
विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से जुड़े किसानों ने अपनी मांगों को उठाने के लिए साझा मंच का गठन किया है। अक्टूबर में बारिश की मार से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था तथा राज्य के कई हिस्सों में जलभराव के कारण उत्पादकता भी प्रभावित हुई थी।
निजामाबाद में 36,375 एकड़ में इऔर जगतीलाल के पास 32,000 एकड़ में हल्दी का उत्पादन होता है कि जोकि राज्य के कुल हिस्से 1.33 लाख एकड़ का करीब आधार है।
सीमित ने मांग की कि सरकार निज़ामाबाद में एक हल्दी बोर्ड की स्थापना करे ताकि उनके सामने आने वाली समस्याओं का समाधान किया जा सके और उपज को बढ़ावा दिया जा सके। सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक कार्य योजना बनाने के लिए किसानों की समिति 20 जनवरी के बाद एक बैठक बुलाएगी।
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