नई दिल्ली। स्टॉकिस्टों की बिकवाली के साथ ही निर्यातकों की कमजोर मांग से बासमती चावल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। मंगलवार को हरियाणा, पंजाब एवं दिल्ली के नया बाजार में बासमती चावल के दाम तो स्थिर बने रहे लेकिन ग्राहकी कमजोर ही थी। व्यापारियों के अनुसार पंजाब और हरियाणा के किसानों के आंदोलन का असर व्यापार पर पड़ रहा है।
नया बाजार के बासमती चावल के व्यापारी ने बताया कि इस समय ग्राहकी काफी कमजोर है, तथा स्टॉकिस्टों की मुनफावसूली से भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में बासमती चावल के निर्यात सौदों में बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में माना जा रहा है कि कुल निर्यात पिछले साल से ज्यादा ही होगा। पंजाब और हरियाणा के किसानों के आंदोलन का असर भी व्यापार पर पड़ रहा है। पिछले 34 दिनों से किसान दिल्ली के चारो तरफ डेरा डाले हुए हैं, जिस कारण बासमती चावल की लोडिंग के साथ ही अनलोडिंग प्रभावित हो रही है।
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले आठ महीनों अप्रैल से नवंबर के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 30.47 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात केवल 23.63 लाख टन का ही हुआ था। मूल्य के हिसाब चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में बासमती चावल का निर्यात 20,027 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 17,724 करोड़ रुपये का ही निर्यात हुआ था। गैर-बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में 70.25 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 31.57 लाख टन गैर-बासमती चावल का ही निर्यात हुआ था।
चालू खरीफ विपणन सीजन 2020-21 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद बढ़कर 462.88 लाख टन की हो चुकी है। हरियाणा के साथ ही पंजाब और दिल्ली की नरेला मंडी में स्थानीय मिलों के साथ ही स्टॉकिस्टों की कमजोर मांग होने के कारण मंगलवार को धान के दाम स्थिर हो गए।
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