नई दिल्ली। चावल की महंगाई और किल्लत रोकने के लिए बांग्लादेश ने आयात बढ़ाने का फैसला किया है। चावल के ज्यादा आयात के लिए उसने आयात शुल्क घटाने का फैसला किया है। इसके कारण भारत से गैर बासमती चावल का निर्यात और तेज होने की संभावना है।
गत दिवस बांग्लादेश के खाद्य मंत्री सधन चंद्र मजूमदार ने बताया कि बांग्लादेश सरकार ने आयात शुल्क 62.5 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने का फैसला किया है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े चावल उत्पादक देश बांग्लादेश को लगातार बाढ़ आने से उत्पादन घटने के कारण ज्यादा आयात करना पड़ रहा है। बांग्लादेश में करीब 350 लाख टन चावल का उत्पादन होता है लेकिन भोजन में चावल की प्रधानता के कारण सारा चावल बांग्लादेश खुद ही इस्तेमाल कर लेता है। बाढ़ या सूखे की स्थिति बनने पर उसे समय-समय पर चावल का आयात भी करना पड़ता है।
बांग्लादेशी मंत्री के अनुसार सरकार चावल आयात की इस तरह अनुमति देगी कि उपभोक्ता और किसानों दोनों के हितों के बीच में संतुलन बना रहे। आयातको को 10 जनवरी तक खाद्य मंत्रालय से अनुमति के लिए आवेदन करा होगा। उसके बाद आयात की मात्रा के बारे में मंत्रालय फैसला करेग। सरकार भी चावल का बफर स्टॉक बनाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए पांच लाख टन चावल का आयात किया जाएगा। इसमें से भारत से 150,000 टन आयात के लिए बातचीत चल रही है। सरकार ने हाल के हफ्तों में चावल आयात के लिए कई टेंडर जारी किए हैं। इस साल वर्षा जल से पैदा होने वाले चावल का उत्पादन 15 फीसदी घटने की संभावना है क्योंकि वहां बार-बार बाढ़ और अत्यधिक बारिश से चावल की फसल को क्षति पहुंची।
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