आर एस राणा
नई
दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में धान के उत्पादक राज्यों में प्री-मानसून की
बारिश सामन्य से काफी कम हुई है जिससे धान की रोपाई के लिए किसान टयूबवेल
का सहारा ले रहे हैं। टयूबवेल और नहरों के सहारे धान की रोपाई कर रहे
किसानों की लागत बढ़ गई है।
धान के प्रमुख उत्पादक राज्यों
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चालू खरीफ में प्री-मानसून
की बारिश कम होने के कारण किसान टयूबवेल से सिंचाई कर धान की रोपाई कर रहे
हैं। बिजली की कमी के कारण किसानों को डीजल इंजन से सिंचाई करना मजबूरी है।
इसके साथ ही धान की रोपाई के लिए मजदूरी की दर भी बढ़ गई है, जिससे चालू
खरीफ में धान किसानों की लागत ज्यादा आ रही है।
हरियाणा के
सोनीपत जिले के राजलूगढ़ी गांव के किसान उम्मेद सिंह ने बताया कि इस बार
बारिश हुई नहीं है जबकि धान की पौध तैयार हो चुकी है, इसलिए टयूबवेल से
सिंचाई करके रोपाई करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि डीजल की कीमतों में
भारी तेजी के कारण इस बार लागत ज्यादा आ रही है। वैसे भी रोपाई के समय धान
के खेत में आधा फूट पानी रखना जरुरी है इसलिए हर रोज टयूबवेल चलाना पड़
रहा है।
समालखा के किसान विनोद नारायण ने बताया कि बारिश इस बार
हुई नहीं है, जबकि 15 जून से धान की रोपाई का समय शुरू हो गया है। इसलिए
टयूबवेल से सिंचाई कर रोपाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बार रोपाई
के लिए मजदूरों ने भी भाव बढ़ा दिए हैं। पिछले साल धान रोपाई का भाव 1,800
से 2,000 रुपये प्रति एकड़ था जबकि चालू सीजन में 2,200 से 2,500 रुपये
प्रति एकड़ में रोपाई कर रहे हैं। अत: डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ
ही मजदूरी बढ़ने से धान किसानों पर दोहारी मार पड़ रही है।
कृषि
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ धान की रोपाई अभी तक केवल 10.67 लाख हैक्टेयर
में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई 11.17 लाख
हैक्टेयर में हो चुकी थी। ............ आर एस राणा
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