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21 अप्रैल 2014
अप्रैल-मई में चीनी निर्यात सब्सिडी होगी 3,300 रुपये
सरकार ने अप्रैल मई की अवधि के लिए कच्ची चीनी की खेप के लिए 3,300 रुपये प्रति टन की निर्यात सब्सिडी जारी रखने का फैसला किया है। फरवरी अंत में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान करने के लिए नकदी संकट से जूझ रहे चीनी उद्योग को मदद देने के मकसद से दो साल के लिए 40 लाख टन कच्ची चीनी का निर्यात करने के लिए प्रोत्साहन को मंजूरी दी थी। फरवरी-मार्च के लिए 3,300 रुपये की निर्यात सब्सिडी तय की गई थी। सीसीईए ने हर दो महीने पर सब्सिडी की मात्रा की समीक्षा करने का फैसला किया था, जो रुपये-डॉलर की विनिमय दर पर निर्भर करेगा।
सरकारी सूत्रों ने कहा, 'खाद्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह सब्सिडी की मात्रा की समीक्षा की थी और अप्रैल मई की अवधि के लिए भी इसे 3,300 रुपये पर बनाए रखने का फैसला किया है। इस बारे में अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के अनुसार अप्रैल और मई के दौरान कम से कम 4 लाख टन चीनी के निर्यात की संभावना है। निर्यात की कुछ खेप को पहले ही भेजा जा चुका है।
इस्मा के ताजे आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में शुरू हुए चालू विपणन वर्ष के पहले छह महीनों में कच्ची और रिफाइंड दोनों रूप में ही 14.5 लाख टन चीनी का निर्यात किए जाने का अनुमान है। इसमें से 3,50,000 टन चीनी का पिछले महीने निर्यात किया गया, जो सब्सिडी का पहला महीना था। विपणन वर्ष 2013-14 में 15 अप्रैल तक देश का चीनी उत्पादन 4 फीसदी घटकर 2 करोड़ 31 लाख टन रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2 करोड़ 41.5 लाख टन था। चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में गिरावट आई, जो देश में चीनी के दो शीर्ष उत्पादक राज्य हैं। (BS Hindi)
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