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18 मार्च 2014
रुपये की मजबूती से कपास निर्यातक मुश्किल में
आर एस राणा नई दिल्ली | Mar 16, 2014, 09:46AM IST
कम मार्जिन
कपास के निर्यात सौदों में घट गया है मार्जिन
ऐसे में निर्यात सौदे पहले की तुलना में घट गए हैं
बढ़ेगी कीमत
घरेलू बाजार में बढिय़ा क्वालिटी की कपास की कीमतों में तेजी आने की संभावना
डॉलर के मुकाबले रुपये में आई मजबूती से कपास निर्यात सौदों में मार्जिन कम हो गया है। भारतीय मुद्रा मजबूत होकर अब 61.19 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है।
हालांकि विदेशी बाजार में कपास की कीमतों में भी इस दौरान हल्का सुधार आया है लेकिन घरेलू बाजार में बढिय़ा क्वालिटी की कपास की आवक कम हो गई है। ऐसे में घरेलू बाजार में बढिय़ा क्वालिटी की कपास की कीमतों में तेजी आने की संभावना है।
कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'बिजनेस भास्कर' को बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये के मजबूत होने से कपास के निर्यातकों का मार्जिन कम हो गया है इसलिए निर्यात सौदे पहले की तुलना में कम हो गए हैं। चालू फसल सीजन 2013-14 (अक्टूबर से सितंबर) में अभी तक करीब 85 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास के निर्यात सौदों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है तथा करीब 78 लाख गांठ की शिपमेंट भी हो चुकी है।
हालांकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के भाव 89.05 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 91.5 सेंट प्रति पाउंड हो गया है। कपास की आवक चालू सीजन में अभी तक 8 फीसदी घटकर 247 लाख गांठ की हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 268 लाख गांठ की आवक हुई थी।
नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि निर्यातकों की मांग कम होने से उत्पादक मंडियों में महीनेभर में कपास की कीमतों में करीब 600 रुपये की गिरावट आकर शनिवार को अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म का भाव 42,500-42,700 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रह गया, जबकि फरवरी के आखिर में भाव 43,300 रुपये प्रति कैंडी था।
उन्होंने बताया कि बढिय़ा क्वालिटी की कपास की आवक कम हो रही है जबकि घरेलू मिलों की मांग अच्छी है। देशभर की मंडियों में इस समय दैनिक आवक लगभग 1.50 लाख गांठ की आवक हो रही है तथा होली की छुट्टियों के कारण अगले तीन-चार दिन दैनिक आवक में कमी आने की संभावना है।
मुक्तसर कॉटन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर नवनीत ग्रोवर ने बताया कि कॉटन यार्न में निर्यात मांग पहले की तुलना में कम हुई है जिससे घरेलू बाजार में कॉटन यार्न की कीमतें 235-240 रुपये प्रति किलो से घटकर 225 से 230 रुपये प्रति किलो रह गईं।
उन्होंने बताया की बढिय़ा क्वालिटी की कपास की कीमतें आगामी दिनों में बढऩे की संभावना है। कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2013-14 में कपास की पैदावार 356.02 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2012-13 में 342.20 लाख गांठ की पैदावार हुई थी। (Business Bhaskar...R S Rana)
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