Daily update All Commodity news like : Wheat, Rice, Maize, Guar, Sugar, Gur, Pulses, Spices, Mentha Oil & Oil Complex (Musterd seed & Oil, soyabeen seed & Oil, Groundnet seed & Oil, Pam Oil etc.)
10 मार्च 2014
महाराष्ट्र में भीषण ओलावृष्टि, करोड़ों की फसलें चौपट
मुंबई [जासं]। पिछले दस दिनों से महाराष्ट्र में चल रही बारिश और ओलावृष्टि ने राज्य में फलों की फसलें लगभग चौपट हो गई हैं। नुकसान कई हजार करोड़ का आंका जा रहा है। बड़ी संखया में पशु-पक्षियों के भी मारे जाने की खबर है। इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने कहा है कि ओलावृष्टि से फसलों के नष्ट होने का आंकलन के लिए जल्द केंद्रीय टीम यहां पहुंचेगी।
बरसारत और ओलावृष्टि का ज्यादा असर मराठवाड़ा एवं विदर्भ क्षेद्दों में देखा जा रहा है। मराठवाड़ा की लोहा और कंधार तहसीलें सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं। इन क्षेद्दों में रोज दोपहर बाद शुरू होनेवाली बारिश रात-रात भर चालू रहती है। इन तहसीलों में ओलावृष्टि से कहीं-कहीं तो बर्फ की चार-चार फुट मोती सतह जमा हो चुकी है। सामान्यत: बर्फ की इतनी मोती सतह जममू-कश्मीर और हिमाचल आदि राज्यों में ही देखी जाती है। मौसम विभाग के अनुसार ऐसी ओलावृष्टि इस क्षेद्द में इससे पहले 100 साल में भी नहीं देखी गई है।
इस प्रकार ओले गिरने से नांदेड़ और परभणी में मौसंबी, विदर्भ में संतरे, नासिक क्षेद्द में अंगूर और प्याज की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। गौरतलब है कि देश में संतरों का सर्वाधिक उत्पादन नागपुर के आसपास होता है। इसी प्रकार देश के कुल मौसम्मी उत्पादन का आधा हिस्सा मराठवाड़ा में होता है। प्याज और अंगूर के लिए पूरा देश नासिक का मुंह देखता है। परभणी में मौसंबी और कागजी नींबू का उत्पादन करनेवाले कांतराव देशमुख बताते हैं कि पिछले 10 दिनों से चल रही ओलावृष्टि के कारण हर प्रकार की 90 फीसद फसलें बर्बाद हो चुकी है। ज्वार और गेहूं का भी यही हाल है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3.5 लाख हेक्टेयर भूमि पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जबकि एक लाख हेक्टेयर पर आंशिक नुकसान हुआ है। रविवार को केंद्रकृषिमंद्दी शरद पवार स्वयं इस क्षेद्द में जाकर किसानों से मिले और नुकसान का जायजा लिया। प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने में चुनाव आचारसंहिता बाधा न बने, इस विषय में मुखयमंद्दी पृथ्वीराज चह्वाण ने राज्य के चुनाव आयुक्त से भी चर्चा की है। मुखयमंद्दी ने किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार से भी 340 करोड़ रुपये की मांग की है। लेकिन किसानों का मानना है कि ओलावृष्टि से हुए नुकसान की तुलना में कोई भी सरकारी मदद ऊंट में के मुंह में जीरा ही साबित होगी। (Jagran)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें