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28 जनवरी 2014
पहली छमाही में एक अरब डॉलर के मसालों का निर्यात
अमेरिका बना रहा भारतीय मसालों का सबसे बड़ा आयातक
चालू वित्त वर्ष 2013-14 की पहली छमाही अप्रैल-सितंबर के दौरान लाल मिर्च और जीरे का जोरदार निर्यात हुआ। इसकी बदौलत मसालों का कुल निर्यात इस अवधि में 31 फीसदी बढ़कर 3.78 लाख टन हो गया। इसकी कुल कीमत करीब एक अरब डॉलर है।
स्पाइसेज बोर्ड के डायरेक्टर (मार्केटिंग) के. सी. बाबू ने बताया कि मसालों के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी में लाल मिर्च और जीरे का सबसे ज्यादा योगदान रहा। देश में बेहतरीन किस्म के मसालों का उत्पादन होता है। अमेरिका जैसे तमाम देशों में इनकी जोरदार मांग रही। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 78. 75 करोड़ डॉलर के मसालों का निर्यात किया गया था।
बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीरे का निर्यात 93 फीसदी ज्यादा रहा जबकि लाल मिर्च के निर्यात में 6 फीसदी का इजाफा हुआ। इसके अलावा काली मिर्च, हल्दी, इलायची और सौंफ के निर्यात में बढ़ोतरी हुई। मात्रा के लिहाज से मसालों का निर्यात 3.14 लाख टन से बढ़कर 3.78 लाख टन हो गया।
इस दौरान भारतीय मसालों का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका ही बना रहा। इसके अलावा मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, जर्मनी, सिंगापुर और ब्रिटेन भारतीय मसालों के बड़े आयातक देश हैं। पिछले वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान मसालों का निर्यात 22 फीसदी बढ़कर 699,170 टन हो गया था।
इस दौरान मसाला निर्यात मूल्य के हिसाब से 14 फीसदी बढ़कर 11,171.16 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान 9783.42 करोड़ रुपये मूल्य के मसालों का निर्यात किया गाय था। (Business Bhaskar)
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