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25 जनवरी 2014
सिंजेंटा पर जीएम मक्का बीज की बिक्री रोकने का दबाव
चीन को लेकर मुश्किल
अमेरिका के दो संगठनों ने बीजों की बिक्री रोकने की मांग उठाई
चीन में सिंजेंटा की दो जीएम मक्का किस्मों को नहीं मिली मंजूरी
प्रतिबंधित विपटेरा मक्का की खेपें रद्दा हो रही हैं चीन में
इससे अमेरिका में उत्पादकों और कारोबारियों को भारी नुकसान
अमेरिका में अनाज उत्पादकों के दो संगठनों ने सिंजेंटा एजी से मक्का की दो जेनेटिकली मॉडीफाइनड (जीएम) किस्मों की व्यावसायिक खेती रोकने की मांग की है। चीन की सरकार ने अभी तक दुनिया की सबसे बीज कंपनी सिंजेंटा द्वारा विकसित मक्का की इन किस्मों को मंजूरी नहीं दी है। इन किस्मों की मक्का की खेपें चीन सरकार नामंजूर कर रही है।
पिछले नवंबर से इन दोनों किस्मों वाली मक्का की खेपें चीन में रद्द होने के कारण उत्पादकों के संगठनों ने सिंजेंटा से अनुरोध किया है। नवंबर से अब तक चीन के अधिकारी करीब छह लाख टन अमेरिकी मक्का रद्द कर चुके हैं।
यह मक्का सिंजेंटा द्वारा विकसित एग्रीस्योर विपटेरा जीएम (एमआईआर 162 के रूप में प्रचलित) किस्म की है। दो वर्षों से ज्यादा समय से मक्का की इस किस्म को चीन में मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है। अमेरिका में 2010 में इसे मंजूरी दे चुका है।
नेशनल ग्रेन एंड फीड एसोसिएशन (एनजीएफए) और नॉर्थ अमेरिकन एक्सपोर्ट ग्रेन एसोसिएशन (एनएईजीए) ने सिंजेंटा को पत्र लिखा है कि जब तक चीन और दूसरे आयातक मंजूरी नहीं दे देते हैं, तब तक विपटेरा और ड्यूरासेड किस्मों की मक्का की खेती स्थगित रखनी चाहिए। विपटेरा किस्म की खेती अमेरिका, अर्जेंटीना और ब्राजील में पिछले तीन वर्षों से हो रही है।
सिंजेंटा कॉर्प के प्रवक्ता पॉल माइनहर्ट ने कहा कि अमेरिका में हमारी मार्केटिंग योजना बदलने से अब प्रचलित अनाज किस्मों और चीन द्वारा मक्का आयात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उधर, अनाज उत्पादकों के संगठनों का कहना है कि आयातक देशों में मंजूरी मिलने से पहले जीएम बीजों की बिक्री शुरू होने से निर्यात बाजार पर खतरा पैदा हो गया है।
दोनों ही संगठन मौजूदा स्थिति से अत्यंत चिंतित हैं। सिंजेंटा के मौजूदा नजरिये की वजह से निर्यातकों, कारोबारियों और अंतत: उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सिंजेंटा इस साल ड्यूरासेड किस्म की मक्का लांच करने वाला है। बुधवार को भेजे पत्र में उत्पादक संगठनों ने कहा है कि इससे जोखिम बढ़ जाएगा और नुकसान भी कहीं ज्यादा होगा। तात्कालिक रूप से आवश्यक है कि कंपनी इस नुकसान को रोकने का कदम उठाए।
दूसरी ओर चीन की सरकार तक तक किसी जीएम किस्मों का पुनरीक्षण शुरू नहीं करती है, जब तक अमेरिकी सरकार उसे मंजूरी न दे दे। ड्यूरासेड के मामले में अमेरिका ने फरवरी 2013 में मंजूरी दी थी। इसके बाद कंपनी ने मार्च 2013 में चीन में इसके परीक्षण के लिए आवेदन किया।
कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि असली मसला आयातक देशों में मंजूरी के लिए प्रक्रिया एक साथ शुरू न होने की है। उत्पादक देशों से खरीद के लिए आयातक देशों को अपनी नियामक संबंधी प्रक्रिया समन्वित तरीके से पूरी करनी चाहिए, जिससे बाजार में समय पर नई तकनीक का माल आ सके और कारोबार में कोई बाधा न हो।
एनजीएफए के अध्यक्ष रैंडी गॉर्डन ने एक इंटरव्यू में कहा कि कंपनी ने 2014 में ड्यूरासेड लांच करने के लिए जो समय रखा है, वह मंजूरियों के लिए पर्याप्त नहीं है। चीन में इसको मंजूरी मिलने में ज्यादा समय लग सकता है।
उन्होंने कहा कि चिंताओं पर सिंजेंटा को अवगत कराने के लिए संगठनों को और ज्यादा बातचीत करने की जरूरत होगी। संगठनों ने किसानों से भी अपील की है कि वह 2014 की मक्का फसल बोने से पहले समूचे मुद्दे की आकलन कर लें।
नेशनल कॉर्न ग्रोवर्स एसोसिएशन ने कहा है कि उसे कोई समाधान निकलने की उम्मीद है जिससे उत्पादक नई तकनीक का लाभ ले सकें और वैश्विक व्यापार सुचारु रूप से चल सके। (Business Bhaskar)
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