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23 जनवरी 2014
बेमौसम बारिश से होगा जीरे को नुकसान!
पिछले कुछ दिनों के दौरान बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी जीरे और तंबाकू की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि यह गेहूं और रबी की अन्य फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। आणंद कृषि विश्वविद्यालय (एएयू) के कुलपति ए एम शेख ने कहा, 'हाल में हुई बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी। लेकिन इसका नकारात्मक पहलू यह है कि जमीन में नमी से खेतों में खड़ी जीरे और तंबाकू जैसी फसलों में बीमारियों को बढ़ावा मिल सकता है।' उन्होंने कहा कि इस बारिश से जीरे की फसल को और ज्यादा नुकसान पहुंचने की आशंका है। शेख के मुताबिक वातावरण में नमी के कारण आम में फूल आने पर असर पड़ सकता है।
गुजरात के कृषि मंत्री गोविंद पटेल ने कहा, 'अभी फसल को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं है, लेकिन हाल में हुई बेमौसम बारिश से जीरा, धनिया और सौंफ जैसी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।' राजकोट में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पी डी राठौड़ ने दावा किया, 'हाल की बारिश से करीब 5-10 फीसदी जीरे की फसल को नुकसान पहुंच सकता है और यदि बारिश आगे भी जारी रही तो जीरे को और ज्यादा नुकसान होगा।Ó उन्होंने कहा कि जीरे की फसल में कुम्हलाने की बीमारी होने की आशंका है। 20 जनवरी तक गुजरात में जीरे की बुआई 4,55,000 हेक्टेयर में हो चुकी थी, जो पिछले साल इस समय तक 3,35,200 हेक्टेयर थी। इसी तरह गेहूं की बुआई 14.1 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि में 10.4 लाख हेक्टेयर थी। राज्य में तंबाकू की बुआई 949 हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है।
जीरे की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका से इस जिंस की कीमतें चढ़ गई हैं। पिछले दो दिनों के दौरान जीरे का भाव 50 रुपये बढ़कर 2,200-2,350 रुपये प्रति 20 किलोग्राम हो गया है। ऊंझा के एक जीरा कारोबारी ने कहा, 'गुजरात में बेमौसम बारिश के बाद बाजार की धारणा बदली है और जीरे की कीमत बढ़ी है।' गुजरात कृषि विभाग के मुताबिक 2013-14 में रबी सीजन की बुआई 6 जनवरी तक 38,4 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि में 29.6 लाख हेक्टेयर थी। (BS Hindi)
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