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09 दिसंबर 2013
दाम कम तो किसानों ने घटाई कपास की आवक
इस साल देश में कपास उत्पादन ज्यादा रहने का अनुमान जताया जा रहा है, लेकिन फसल की आवक पिछले साल की तुलना में 30 से 35 फीसदी कम बनी हुई है। इसकी वजह यह है कि किसान वर्तमान कीमतों पर अपनी फसल बेचने को तैयार नहीं हैं। पिछले साल इस महीने में दैनिक आवक 2,10,000 से 2,25,000 गांठ थी, जो इस साल 1,60,000 से 1,70,000 है। देश के सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य गुजरात में इस समय आवक 55,000 से 60,000 गांठों के बीच है, जो एक साल पहले 85,000 से 90,000 गांठ थी। अहमदाबाद की अरुण कुमार ऐंड कंपनी के अरुणभाई दलाल ने कहा, 'देश में कम आवक की एक वजह सीजन में देरी होना भी है।' विशेषज्ञों ने कहा कि किसान कीमत 1,000 रुपये प्रति 20 किलोग्राम मांग रहे हैं और वे कीमतों के स्तर पर आने तक इंतजार करने को तैयार हैं।
सीजन की शुरुआत में कीमत 48,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) थी, जो गिरकर अब 38,500 से 39,000 रुपये पर आ गई है। ज्यादा उत्पादन के अनुमान और कम मांग के चलते सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक कीमतें 9,000 रुपये प्रति कैंडी गिर चुकी हैं। गुजरात के विभिन्न बाजारों में कच्चे कपास की कीमत 930 से 960 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इंटरनैशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी (आईसीएसी) के अनुसार पिछले तीन सीजन में कीमत की स्थिति को देखते हुए 2013-14 में वैश्विक उत्पादन वैश्विक खपत से ज्यादा रहने का अनुमान है। वर्ष 2013-14 में वैश्विक उत्पादन 2.56 करोड़ टन अनुमानित है, जो पिछले सीजन से 12 लाख टन कम है। वहीं 2013-14 में वैश्विक खपत 2.38 करोड़ टन अनुमानित है, जो पिछले सीजन से 2 फीसदी ज्यादा है।
वैश्विक स्तर पर भी कीमतों में गिरावट का रुझान है। आईसीएसी ने अप्रैल में अपनी दिसंबर रिपोर्ट के बारे में अनुमान जताया था कि चालू सीजन में कीमतें 118 सेंट प्रति पाउंड रहेंगी। लेकिन तब से कीमतें गिरी हैं और पूर्वानुमान का मध्य बिंदु 88 सेंट के आसपास है। सौराष्ट्र जिनर्स एसोसिएशन (एसजीए) के उपाध्यक्ष अरविंद पटेल ने कहा, 'किसान ज्यादा कीमत चाहते हैं, क्योंकि उनकी लागत बढ़ी है। बुआई और कटाई के दौरान मजदूरी, बीज, कीटनाशक की लागत बढ़ी है।' आमतौर पर इस समय या दिसंबर के दौरान जिनर्स अपनी इकाइयों को दो पारियों में चलाते हैं, लेकिन इस बार पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने के कारण ज्यादातर जिनर्स एक ही पारी में अपनी इकाई चला रहे हैं। (BS Hindi)
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