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05 दिसंबर 2013
दालों की कम कीमत ने दी ऊंची महंगाई से राहत
खाद्य महंगाई के बढ़ते दौर में दालों ने लोगों को बड़ी राहत दी है। दालों की महंगाई इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच गिरकर -4.8 फीसदी रही है, जो पिछले साल इसी अवधि में 23 फीसदी थी। क्रिसिल के एक अध्ययन में कहा गया है कि दालों में गिरावट आगे भी जारी रह सकती है। दाल कीमतें कम से कम रबी सीजन के अनुमानित बंपर उत्पादन के बाजार में आने तक नीचे रहेंगी। हालांकि दालों की महंगाई मांग में इजाफे और किसानों के उत्पादन बढ़ाने या न बढ़ाने पर निर्भर करेगी। चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत में खाद्य महंगाई लगातार बढ़ रही है, जो अक्टूबर में 18.2 फीसदी बढ़ी है। महंगाई में तेजी की मुख्य वजह चावल, फल, सब्जियों और एनिमल प्रोटीन (अंडे/मांस/मछली) की कीमतों में तेजी आना है। हालांकि अप्रैल से अक्टूबर के दौरान औसत खाद्य मुद्रास्फीति 13.3 फीसदी रही है।
हालांकि सभी खाद्य उत्पादों की कीमतों में तेजी नहीं आई है। दालों की कीमतों में गिरावट रही है। चीनी की कीमतें भी अक्टूबर में 6.9 फीसदी गिरी हैं, जो सितंबर 2012 में 18.4 फीसदी बढ़ी थीं। खाद्य तेल की कीमतें भी अक्टूबर में 0.7 फीसदी गिरी हैं, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में ये करीब 10 फीसदी बढ़ी थीं।
थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर चालू वित्त वर्ष के पहले 7 महीनों में दालों की कीमतें 4.8 फीसदी गिरी हैं। रकबे में बढ़ोतरी और आयात पर कम निर्भरता से दालों की कीमतों में नरमी रही है। आमदनी में सुस्त वृद्धि और दालों की मांग में संभावित गिरावट से भी मदद मिली है। हालांकि अच्छे मॉनसून, न्यूनतम समर्थन मूल्य में कम बढ़ोतरी और कमजोर मांग से अगले कुछ महीनों में दालों की महंगाई नीचे रहने की संभावना है। हालांकि अगले कुछ महीनों में कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं। कुछ अन्य खाद्य श्रेणियों की महंगाई दरों में भी गिरावट शुरू हो गई है। उदाहरण के लिए मोटे अनाजों की महंगाई अक्टूबर में गिरकर 12 फीसदी रही है, जो कुछ महीने पहले 17-19 फीसदी के आसपास थी। (BS Hindi)
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