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02 अक्टूबर 2013
एफएमसी के अधीन था एनएसईएल!
लगता है कि नैशनल स्पॉट एक्सचेंज (एनएसईएल) फरवरी 2012 से पहले जिंस बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के दायरे में था। अगस्त में एनएसईएल में भुगतान संकट के बाद एफएमसी ने वेबसाइट पर स्पॉट एक्सचेंजों के संबंध में सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं की श्रृंखला पेश की थी।
उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा पहला अधिसूचना 5 जून 2007 को जारी की गई थी। इस अहम अधिसूचना पर तब वरिष्ठï आर्थिक सलाहकार पॉल जोसफ के हस्ताक्षर किए गए थे और इसमें फॉर्वर्ड कॉन्ट्रैक्ट्ïस रेग्युलेशन ऐक्ट के दायरे से नैशनल स्पॉट एक्सचेंज पर होने वाले सभी एकदिवसीय वायदा अनुबंधों को सशर्त छूट दी गई। पहली शर्त थी, 'एक्सचेंज के सदस्यों द्वारा शॉर्ट सेल की अनुमति नहीं होगी। शर्त (4) में कहा गया था कि व्यापार से संबद्घ सभी सूचनाएं केंद्र सरकार या उसकी नामांकित एजेंसी को मुहैया कराई जाएंगी।Ó
6 फरवरी 2012 की अधिसूचना के अनुसार '2007 की अधिसूचना में 'उसकी नामांकित एजेंसीÓ शब्दों को बदल कर 'वायदा बाजार आयोगÓ कर दिया गया। इसकी व्यापक रूप से व्याख्या की गई थी।
हालांकि बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा एफएमसी के संवाद पत्रों की समीक्षा किए जाने से पता चलता है कि इससे कई महीने पहले मंत्रालय ने एफएमसी को स्वयं पहली सरकारी अधिसूचना के तहत नामांकित एजेंसी नियुक्त किया था। नामांकित एजेंसी को उन सभी स्पॉट एक्सचेंजों को पर्यवेक्षण मुहैया कराए जाने की जिम्मेदारी तय की गई थी जिन्हें एफसीआरए की धारा 27 के तहत छूट प्रदान की गई है। एफएमसी ने 2007 की अधिसूचना के तहत निर्धारित शर्तों की निगरानी के लिए एक रिपोर्टिंग फॉर्मेट भी बनाया था और इसे सितंबर 2011 में एनएसईएल को भेजा।
एनएसईएल के निवेशकों का कहना है यह पत्र इस इरादे का खंडन करता है कि एनएसईएल एक नियंत्रणमुक्त संस्था थी, क्योंकि यह कम से कम 2011 से तो जिंस नियामक के दायरे में थी। अपने बकाया के लिए लड़ाई लड़ रहे कई निवेशकों ने 2011-12 में इसमें प्रवेश किया था। एनएसईएल के पूर्व प्रबंध निदेशक अंजनी सिन्हा और उसके गोदाम प्रमुख जय बहुखंडी की स्वीकारोक्ति से यह संकेत मिलता है कि 24 उधारकर्ताओं में से अधिकतर ने 2011-12 में एक्सचेंज के साथ समझौता किया। (BS HIndi)
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