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07 अक्टूबर 2013
पिछले सीजन में चावल खरीद लक्ष्य से कम
सितंबर में खत्म हुए सीजन में 341 लाख टन चावल की सरकारी खरीद
सितंबर में समाप्त हुए मार्केटिंग वर्ष 2012-13 के दौरान सरकार की चावल खरीद 341 लाख टन रही। यह खरीद पिछले मार्केटिंग सीजन 2011-12 की खरीद के मुकाबले करीब तीन फीसदी कम रही। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में सरकारी खरीद सुस्त रहने से कुल खरीद में कमी दर्ज की गई।
पिछले अक्टूबर से शुरू हुए आलोच्य मार्केटिंग वर्ष के दौरान सरकार ने 402 लाख टन चावल खरीद का लक्ष्य रखा था। इस हिसाब से चावल की खरीद लक्ष्य के मुकाबले काफी कम रही।
मार्केटिंग वर्ष 2011-12 में 350 लाख टन चावल की खरीद हुई थी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार की एजेंसियां खुले बाजार में भाव गिरने से रोकने और किसानों को समर्थन देने के लिए सरकारी खरीद करती हैं, जिससे किसानों को सुनिश्चित भाव मिल सके।
सरकार गेहूं और चावल की खरीद करके तमाम सरकारी कल्याणकारी स्कीमों में वितरित करती है। एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमने 2012-13 के दौरान 402 लाख टन लक्ष्य के मुकाबले 341 लाख टन चावल की खरीद की है।
दो राज्यों में सरकारी खरीद काफी कम रहने के कारण कुल खरीद फीकी रही। इन दोनों राज्यों आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पिछले साल सूखे जैसी स्थिति रहने की वजह से चावल की पैदावार कम रही थी। इसके चलते सरकारी खरीद केंद्रों पर बिक्री के लिए चावल कम लाया गया।
आंध्र प्रदेश में चावल की खरीद 96 लाख टन से घटकर 64.5 लाख टन रह गई। इसी तरह तमिलनाडु में खरीद 154.7 लाख टन से घटकर 48.9 लाख टन रह गई। लेकिन पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में खरीद पिछले साल से बेहतर रही। पंजाब में खरीद 77.3 लाख टन से बढ़कर 85.5 लाख टन हो गई। छत्तीसगढ़ में खरीद 41.1 लाख टन से बढ़कर 48 लाख टन हो गई।
इसी तरह हरियाणा में खरीद 16 लाख टन से बढ़कर 25 लाख टन हो गई। एफसीआई और राज्य की एजेंसियों ने कॉमन वैरायटी धान की खरीद 1250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर की थी। ए ग्रेड धान की खरीद 1280 रुपये प्रति क्विंटल पर की गई। इसकी बाद में मिलिंग की गई। पिछले मार्केटिंग सीजन में देश में 1044 लाख टन चावल की कुल पैदावार रही। (Business Bhaskar)
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