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23 सितंबर 2013
स्टॉक के लिए सरकार खरीदे चीनी'
चीनी उद्योग की मदद के लिए 20 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने में सरकार ने कम रुचि दिखाई है। लेकिन उद्योग का मानना है कि मिलों के पास नकदी की समस्या दूर करने के लिए ऐसा कदम उठाए जाने की जरूरत है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कम कीमतों की वजह से मिलों को नकदी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान अब तक के सर्वोच्च स्तर 12,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
उद्योग ने सरकार के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये चीनी बिक्री के लिए बफर स्टॉक करने के अलावा चीनी पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी और 2 साल के लिए आयात पर रोक लगाने की मांग की है।
इस महीने के अंत में समाप्त होने वाले चीनी सत्र 2012-13 में बचा हुआ स्टॉक 86 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर होगा, जबकि आमतौर पर करीब 40 लाख टन स्टॉक की जरूरत होती है। यह सीजन के अंत तक 1 करोड़ टन के पार भी निकल सकता है।
भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) और नैशनल फेडरेशन ऑफ कॉपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएफसीएसएफ) दोनों ने चीनी पर आयात शुल्क को वर्तमान 15 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी करने और निर्यात पर सब्सिडी देने की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि निर्यात को प्रत्यक्ष प्रोत्साहन के अलावा चीनी उद्योग चाहता है कि सरकार को कुछ अप्रत्यक्ष प्रोत्साहनों के बारे में भी विचार करना चाहिए। इसमें डीईपीबी रेट में बढ़ोतरी और देश के भीतर परिवहन शुल्क पर रिइंबर्समेंट दिया जाए।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'चीनी उद्योग को घाटा होता रहेगा और यह अगले चीनी सीजन (2013-14) में भी किसानों को तब तक भुगतान नहीं कर पाएगा, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में 20 से 30 लाख टन चीनी बेचने का कोई रास्ता नहीं ढूंढ लिया जाता।Ó उन्होंने कहा कि कम अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण निर्यात अलाभकारी हो गया है। उद्योग ने सरकार से पीडीएस जरूरतों के लिए कम से कम 20 लाख टन चीनी खरीदने का आग्रह किया है।
उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इससे न केवल सरकार को पीडीएस के लिए कम कीमत पर चीनी मिलेगी बल्कि चीनी उद्योग को भी अपना स्टॉक कम करने और किसानों को भुगतान के लिए नकदी मिलेगी।Ó कुछ महीने पहले विनियंत्रण योजना के तहत सरकार ने मिलों से आवश्यक वार्षिक खरीद बंद कर दी थी। अब राज्य खुले बाजार से खुली निविदा के जरिये चीनी खरीदते हैं और इसे 13.50 रुपये प्रति किलोग्राम की निर्धारित दर पर बेचते हैं। चीनी की खरीद कीमत और पीडीएस के जरिये बिक्री की कीमत के बीच अंतर की भरपाई केंद्र करता है। अधिकारियों ने कहा कि उद्योग के प्रतिनिधियों ने आयात पर कम से कम दो साल के लिए पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है। उन्होंने एक योजना के लिए भी कहा है, जिसमें चीनी कंपनियों को नकदी बढ़ाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाए। (BS Hindi)
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