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23 अप्रैल 2013
जिंसों के घटते दाम, कंपनियां होंगी मालामाल
पिछले कुछ महीनों के दौरान सभी सेगमेंट की जिसों में भारी गिरावट से 2013-14 में भारतीय कंपनियों के घटते लाभ पर लगाम लग सकती है। सभी सेगमेंट की जिसों की कीमतें 15-20 फीसदी कम हुई हैं। इस दौरान देश में धातु की कीमतें 7-10 फीसदी गिरी हैं।
यूरोपीय ऋण संकट और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के क्वांटिटिव ईजिंग कार्यक्रम को जल्द समाप्त करने की चिंताओं के बाद मध्य फरवरी से जिंस बाजार का रुझान उलट गया है। पिछले सप्ताह चीन की आर्थिक वृद्धि उम्मीद से कम रहने से जिंसों की कीमतों में गिरावट के रुझान को और बल मिला है। मूल धातुएं औसतन 15 फीसदी नीचे हैं, जबकि ब्रेंड क्रूड ऑयल 17 फीसदी गिर चुका है। रबर 23 फीसदी नीचे चला गया है।
एक स्वतंत्र आर्थिक चिंतक संस्था सीएमआई के एमडी महेश व्यास ने कहा, 'क्रूड तेल की कीमतों में भारी गिरावट समेत सभी जिंसों के लुढ़कने से भारतीय कंपनियों का शुद्ध लाभ मार्जिन नाटकीय रूप से सुधर सकता है। विनिर्माण कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि उनकी उत्पादन लागत में दो-तिहाई हिस्सा कच्चे माल का होता है।Ó उन्होंने कहा कि अगर जिंसों की कीमतें कम रहीं तो शुद्ध लाभ वर्तमान स्तर से दोगुना हो सकता है।
जिंसों की गिरती कीमतों पर नोमुरा के मुख्य अर्थशास्त्री (जापान के अलावा पूरा एशिया) रोब सुब्बारमन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा, 'यह मानते हुए कि जिंसों की कीमतों में हालिया गिरावट रहेगी तो भारत ऊंची वृद्धि, कम मुद्रास्फीति और बेहतर आर्थिक फंडामेंटल्स के लिहाज से प्रमुख देशों में शामिल होगा।Ó उन्होंने कहा, 'जिंसों की कीमतों में गिरावट से ऊर्जा और अन्य लागतों में कमी आती है, इसलिए एशिया की विनिर्माण लागत घट रही है। इससे लाभ मार्जिन बढ़ता है, जो स्पष्ट रूप से व्यावसायिक निवेश के लिए सकारात्मक है।Ó
मांग कम होने और तरलता खत्म होने की चिंताओं से दुनियाभर में जिंसों की कीमतें गिरी हैं। चीन की कम आर्थिक वृद्धि से जिंसों की मांग में गिरावट आएगी। पिछले कुछ वर्षों से जिंसों की मांग बढ़ाने में चीन का अहम योगदान रहा है। कच्चे माल की लागत में गिरावट से भारतीय कंपनियों को भी फायदा होगा।
नोमुरा के सुब्बारमन कहते हैं, 'जिंसों की कीमतों में हालिया गिरावट के लिए ऋणात्मक मांग का झटका ज्यादा विश्वसनीय व्याख्या लगती है।Ó हालांकि उन्हें उम्मीद है कि चालू कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही में मांग सुधरेगी। उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि अगर दूसरी छमाही में वैश्विक मांग सुधरती भी है तो जिंसों की वैश्विक कीमतें इन्हीं स्तरों पर रहेंगी। इसकी वजह आपूर्ति में सकारात्मक सुधार होना है जैसे अच्छे मौसम से खाद्य कीमतों पर असर पड़ेगा। वहीं, अमेरिका में शेल गैस और ऑस्ट्रेलिया में एलपीजी के उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना है।Ó
विभिन्न कंपनियों और क्षेत्रों पर असर अलग-अलग होगा, लेकिन कच्चे माल की लागत में तेजी से गिरावट आएगी। ईंधन की कीमतों में गिरावट से ऊर्जा लागतों और क्रूड ऑयल के डेरिवेटिव अन्य कच्चे माल के लागत में कमी आएगी। सोने की कीमतों में गिरावट से निश्चित रूप से आभूषण कंपनियों पर चोट पड़ेगी। (BS hindi)
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