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22 मार्च 2013
2013 में सोना खरीद के शुभ दिन ज्यादा
सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर अगर सरकार यह सोच रही है कि इससे इसके आयात में कमी आएगी तो उसकी यह उम्मीद गलत साबित हो सकती है। कम से कम विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के शुरुआती संकेत तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
डब्ल्यूजीसी ने कहा है कि जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान आयात ज्यादा रहा है और पूरे वर्ष के दौरान भी आयात पिछले साल से अधिक रह सकता है। डब्ल्यूजीसी का तर्क है कि इस साल सोने की खरीद की तारीखें या अवसर पिछले साल की तुलना में 20 फीसदी अधिक हैं।
डब्ल्यू्जीसी ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2013 में भारत की सोने की मांग 865 से 965 टन के बीच रहेगी। पिछले साल सोने की मांग 864.2 टन थी। डब्ल्यूजीसी के वैश्विक प्रबंध निदेशक (लाइफस्टाइल ऐंड ज्वैलरी) डेविड लैंब ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए साक्षात्कार में कहा कि पिछले साल यानी 2012 में हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना होने और वैवाहिक सीजन छोटा होने से सोने की खरीदारी के मौके कम थे। लेकिन इस साल ये बढ़ेंगे, इसलिए सोने की मांग बढ़ेगी।
भारत में सोने का उत्पादन नहीं होता है और समूची मांग की पूर्ति आयात और पुराने सोने के जरिये होती है। पिछले साल सोने का आयात 864 टन था, जबकि पुराने सोने की आपूर्ति 117 टन थी। लैंब ने कहा, 'आयात का दायरा काफी बड़ा है, क्योंकि सोने की कीमतें कई कारकों जैसे विनिमय दर, महंगाई और उपभोक्ताओं के विश्वास आदि से प्रभावित होती हैं। लेकिन सकारात्मक पक्ष में देखें तो 2013 में कई शुभ दिन हैं।Ó डब्ल्यूजीसी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल सोने की खरीदारी की शुभ तारीखें 20 दिन कम थीं, जिससे आभूषणों की मांग 11 फीसदी घटकर 552 टन रही। इस वर्ष के चालू महीने में आभूषण विनिर्माताओं को अच्छी मांग निकलने की उम्मीद है और यह रुझान जून तक जारी रह सकता है। उसके बाद अगस्त और अक्टूबर से वर्ष के अंत तक मांग निकलती रहेगी।
गीतांजलि जेम्स के प्रबंध निदेशक मेहुल चोकसी ने कहा, 'पिछले साल की तुलना में इस वर्ष अच्छी बिक्री की उम्मीद है और कीमत के लिहाज से उम्मीद है कि बिक्री में 20-25 फीसदी इजाफा होगा।Ó
पिछले साल वैवाहिक सीजन छोटा था, जिससे आभूषणों की बिक्री पर असर पड़ा, लेकिन इस साल मुहूर्त बढ़े हैं, जिनसे सोने की बिक्री में इजाफा होगा। इससे पहले विश्व स्वर्ण परिषद के प्रबंध निदेशक (भारत) शोमसुंदरम को उद्धृत करते हुए ब्लूमबर्ग ने कहा था कि इस साल आयात ज्यादा रहेगा और आयात में बढ़ोतरी मांग जितनी ही होगी। अगर आयात ज्यादा रहा और रुपये में सोने की कीमतें पिछले साल के समान रहीं तो चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने के सरकार के प्रयास सफल नहीं हो सकेंगे।
शोमसुंदरम ने ब्लूमबर्ग से कहा, 'हालांकि चालू खाते का घाटा गंभीर मुद्दा है, लेकिन शुल्क बढो़तरी और सोने की मांग पर रोक लगाना सही उपाय नहीं है और इससे समस्या हल नहीं होगी।Ó उन्होंने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुधार के संकेत दिखा रही है और इससे अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़ेगा जिससे चालू खाते का घाटा नीचे लाने में मदद मिलेगी। भारतीय निर्यात के लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है। (BS Hindi)
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