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18 फ़रवरी 2013
निर्यात के लिए प्राइवेट व्यापारियों को भी सरकारी गेहूं देने की तैयारी
दबाव - अगली फसल आने से पहले सरकार पर गोदाम खाली करवाने का दबाव
एफसीआरए - जिंस वायदा बाजार को ज्यादा अधिकार देने के लिए सरकार फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट को बजट सत्र में पास कराने की कोशिश होगी।
सीटीटी - कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स के प्रस्ताव पर सभी संबंधित पक्षों से राय ली गई है। इन पक्षों के विचारों की जानकारी वित्त मंत्रालय को दी गई है।
गेहूं के भारी-भरकम स्टॉक को हल्का करने के लिए सरकार केंद्रीय पूल से प्राइवेट निर्यातकों को भी निर्यात करने के लिए गेहूं देगी। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलात मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के. वी. थॉमस ने बताया है कि जिंस वायदा बाजार को ज्यादा अधिकार देने के लिए सरकार फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) को बजट सत्र में पास कराने की कोशिश करेगी।
थॉमस ने एसोचैम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि खाद्यान्न की भंडारण समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय पूल से प्राइवेट निर्यातकों को गेहूं देने का प्रस्ताव है। इस बारे में संबंधित मंत्रालय से बातचीत चल रही है। हालांकि उन्होंने प्राइवेट निर्यातकों को दिए जाने वाले गेहूं की मात्रा के बारे में नहीं बताया।
सूत्रों के अनुसार खाद्य मंत्रालय केंद्रीय पूल से प्राइवेट निर्यातकों को 50 लाख टन गेहूं देने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इससे केंद्रीय पूल से गेहूं का उठाव बढ़ेगा। वर्तमान में केंद्रीय पूल से सार्वजनिक कंपनियों एसटीसी, एमएमटीसी और पीईसी के माध्यम से गेहूं का निर्यात किया जा रहा है।
केंद्रीय पूल में पहली फरवरी को 308.09 लाख टन गेहूं का बंपर स्टॉक बचा हुआ है जबकि पहली अप्रैल से रबी विपणन सीजन 2013-14 की गेहूं की खरीद शुरू हो जाएगा। नए रबी विपणन सीजन में 400 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद होने का अनुमान है जबकि पिछले विपणन सीजन में 381.41 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।
थॉमस ने कहा कि एफसीआरए बिल को बजट सत्र में संसद में पेश किया जाएगा। एफ सीआरए बिल पास होने से वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के अधिकार बढ़ जाएंगे तथा इससे कमोडिटी मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू की जा सकेगी, जिससे जिंस वायदा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (सीटीटी) के बारे में थॉमस ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में सीटीटी का मसला मेरे सामने आया था, उस समय हमने सभी संबंधित पक्षों की राय लेकर वित्त मंत्रालय को भेज दिया था।
सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्री को लिखे पत्र में थॉमस ने सीटीटी पर विरोध जताया था। उन्होंने लिखा था कि इस तरह के कदम से कमोडिटी के वायदा कारोबार को नुकसान उठाना पड़ेगा।
कमोडिटी वायदा कारोबार में वैसे भी चालू वित्त वर्ष में कारोबार में कमी आई है। सीटीटी लगने से जिंस वायदा कारोबार में और भी कमी की आशंका है। (Business Bhaskar)
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