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11 फ़रवरी 2013
चालू सीजन में 9.22 लाख टन चीनी आयात के सौदे
अक्टूबर-जनवरी के बीच देश में 137 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ
पिछले अक्टूबर से शुरू नए मार्केटिंग सीजन 2012-13 के दौरान अब तक चीनी कंपनियां 9.22 लाख टन चीनी के आयात सौदे कर चुकी हैं। जबकि इसमें से करीब 8 लाख टन चीनी भारत में आ भी चुकी है।
दूसरी ओर चीनी का घरेलू उत्पादन चालू पेराई सीजन में 31 जनवरी तक बढ़कर 137.51 लाख टन हो
चुका है। चीनी में बड़ी उपभोक्ता कंपनियों की मांग कमजोर है जिससे पिछले डेढ़ महीने में ही दाम करीब 250 रुपये प्रति क्विंटल तक घट चुके हैं।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घरेलू कंपनियां अभी तक 9.22 लाख टन चीनी के आयात सौदे कर चुकी हैं जबकि इसमें से करीब 8 लाख टन चीनी भारत में आ भी चुकी है। उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में चीनी का घरेलू उत्पादन पहले के अनुमान से ज्यादा होने की संभावना है।
साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम लगातार घट रहे हैं। यही कारण है कि घरेलू बाजार में भाव में गिरावट बनी हुई है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में 31 जनवरी तक 137.51 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2.95 फीसदी ज्यादा है।
इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 243 लाख टन होने का अनुमान है जो पहले के अनुमान 240 लाख टन से ज्यादा है। चालू पेराई सीजन में चीनी का सबसे ज्यादा उत्पादन उत्तर प्रदेश में 81 लाख टन होने का अनुमान है। उधर, महाराष्ट्र में में उत्पादन 68 लाख टन, कर्नाटक में 32 लाख टन और तमिलनाडु में 22 लाख टन होने का अनुमान है।
चीनी के थोक कारोबारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि मांग के अभाव में अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्हाइट शुगर के दाम घटकर 430-440 डॉलर प्रति टन रह गए हैं। घरेलू बाजार में बड़ी खपत कंपनियों की मांग का अभाव है जिससे पिछले डेढ़ महीनों में चीनी की कीमतों में 250 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है।
दिल्ली थोक बाजार में शनिवार को चीनी के दाम घटकर 3,350-3,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स-फैक्ट्री भाव घटकर 3,200-3,300 रुपये और महाराष्ट्र में 2,875-2,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
अप्रैल के बाद महंगी हो सकती है चीनी
नई दिल्ली रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा है कि अप्रैल के बाद देश में चीनी की सप्लाई सीमित होने के कारण इसके दाम करीब दो रुपये प्रति किलो बढ़ सकते हैं।
इस साल चीनी का उत्पादन घटने का अनुमान है। इक्रा का कहना है कि चीनी के मूल्य में बढ़ोतरी होने से मिलों को फायदा मिलेगा। इसके अलावा बाय-प्रोडक्ट से भी उनकी आय सुधरेगी। हालांकि गन्ना का ऊंचा मूल्य उनके लाभ पर दबाव डालेगा। इक्रा का अनुमान है कि इस साल देश में चीनी का उत्पादन 230-240 लाख टन के आसपास रह सकता है।
जबकि देश में चीनी की खपत 235 लाख टन रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन 2012-13 की दूसरी छमाही में सप्लाई सीमित रहने पर चीनी के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि पिछले साल का अतिरिक्त स्टॉक करीब 60 लाख टन होगा। इससे तीन माह की मांग पूरी हो सकती है। (Business Bhaskar)
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