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28 फ़रवरी 2013
कृषि के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये अधिक कर्ज
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 2013-14 का बजट पेश करते हुए कृषि ऋण के लक्ष्य में 1.25 लाख करोड़ रुपये की भारी बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव किया.
सरकार ने अगले वित्त वर्ष में 7 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण देने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा विधेयक के क्रियान्वयन के लिए 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी के आवंटन का भी प्रस्ताव किया गया है.
वित्त वर्ष 2013-14 के लिए कृषि मंत्रालय का आवंटन 22 फीसद बढ़ाकर 27,049 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है. इसमें 3,415 करोड़ रुपये की राशि कृषि अनुसंधान के लिए होगी.
चिदंबरम ने फसल ऋण पर ब्याज छूट का दायर निजी और वाणिज्यिक बैंकों तक बढ़ाने की भी घोषणा की.
लोकसभा में 2013-14 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘कृषि उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण योगदान कृषि ऋण का होता है. 2012-13 में हम 5,75,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य पार कर जाएंगे. 2013-14 के लिए मैं इन लक्ष्य को बढ़ाकर 7,00,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव करता हूं.’’
उन्होंने कहा कि लघु अवधि के फसली रिण के लिए ब्याज छूट योजना जारी रहेगी. समय पर ऋण का भुगतान करने वाले किसानों को सालाना 4 फीसद के ब्याज पर ऋण मिलेगा.
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, ‘‘अभी तक यह योजना सरकारी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों में लागू थी. अब इसके दायरे में निजी क्षेत्र के बैंक और वाणिज्यिक बैंक भी आएंगे, जो संबंधित शाखा के सेवा क्षेत्र में दिए गए रिण पर लागू होगा.’’
पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाने की योजना की सफलता को देखते हुए चिदंबरम ने अगले वित्त वर्ष के लिए इस योजना के तहत 1,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. पंजाब और हरियाणा जैसे हरित क्रांति के दायरे में आने वाले राज्यों को फसल विविधीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है.
प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून पर वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि संसद इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित करेगी. खाद्य सब्सिडी के लिए सामान्य प्रावधान के अलावा मैं इस कानून के क्रियान्वयन पर अतिरिक्त खर्च के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करता हूं.’’
कृषि ऋण बढ़ाने का का प्रस्ताव
वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को लोकसभा में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुये बताया कि कृषि ऋण उत्पादन की प्रमुख शक्ति है, इसलिए उन्होंने वर्ष 2012-13 के लिए निर्धारित 5,75,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को बढ़ाकर सात लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है.
उन्होंने बताया कि लघु अवधि के लिए फसली ऋणों के लिए ब्याज माफी योजना जारी रहेगी. समय पर ऋणों का भुगतान करने वाले किसानों को प्रति वर्ष सात प्रतिशत की दर से रिण प्रदान किये जाएंगे.
अभी तक यह योजना सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको तथा सहकारी बैंकों द्वारा दिये गये रिणों पर लागू है. उन्होंने निजी क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिये गये फसल ऋणों के लिए भी इस फायदे को देने का प्रस्ताव किया है.
कृषि अनुसंधान के लिए 3,415 करोड़ रुपये
वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने बजट पेश करते हुये बताया कि कृषि और संबद्ध क्षेत्र में औसत वृद्धि दर 11वीं योजना के दौरान 3.6 प्रतिशत रही. वर्ष 2012-13 के कुल खाद्यान्य उत्पादन 25 करोड़ टन से अधिक होगा.
कृषि उत्पाद के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाये गये हैं, जिससे किसानों ने अधिक उत्पादन किया है. आज देश दाल और जूट के क्षेत्र में वि का सबसे बड़ा उत्पादक है. अप्रैल से दिसंबर 2012 तक देश का कृषि निर्यात 1,38,403 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का हुआ है.
उन्होंने कृषि मंत्रालय को 27,049 करोड़ रुपये आबंटित करने का प्रस्ताव किया है, जो चालू वर्ष के संशोधित अनुमान से 22 प्रतिशत अधिक है.
वित्तमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि इस राशि में से 3,415 करोड़ रुपये कृषि अनुसंधान के लिए दिये जाएंगे.
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