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04 जनवरी 2013
एफसीआई अन्नागार निर्माण के लिए मंगाएगा निजी बोलियां
गेहूं के वैज्ञानिक भंडारण के लिए 20 लाख टन क्षमता के अन्नागारों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसके लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) मार्च में निजी कंपनियों से बोलियां मंगा सकता है। एफसीआई के सूत्रों के मुताबिक तकनीकी विशेषताओं और मानकों को अंतिम रूप दे दिया गया है। आरएफक्यू (पात्रता के लिए आग्रह) और आरपीएफ (प्रस्ताव के लिए आग्रह) को मार्च में जारी किया जाएगा।
सूत्र ने कहा, 'इस मॉडल में निवेश के लिए बहुत सी कंपनियों ने पूछताछ की है, जो हमारे लिए काफी उत्साहजनक है। 20 लाख टन की यह परियोजना आधुनिक भंडारण की दिशा में लंबी छलांग होगी।' अगर अन्नागारों के लिए जमीन राज्य सरकार या एजेंसी मुहैया कराती है तो केंद्र सरकार आवश्यक धन का 20 फीसदी वीजीएफ (वाइबलिटी गैप फंडिंग) के रुप में मुहैया कराएगी। अगर राज्य सरकार जमीन मुहैया नहीं कराती है तो इनका निर्माण बीओओटी (निर्माण, परिचालन, स्वामित्व और हस्तांतरण) आधार पर किया जाएगा। 50,000 टन क्षमता के एक गोदाम के लिए 9-10 एकड़ जमीन की जरूरत होती है। गोदामों के निर्माण के लिए जिन 10 राज्यों को छांटा गया है, उनमें असम सबसे आगे है। राज्य के पास आवश्यक जमीन उपलब्ध है। महाराष्ट्र ने भी कुछ जमीन अधिग्रहीत की है और बाकी जमीन अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया जारी है। उत्तर प्रदेश ने और समय मुहैया कराने की मांग की है। हरियाणा ने जमीन मुहैया कराने से इनकार कर दिया है। अन्य राज्यों ने अभी जमीन के बारे में अपनी तैयारियों की रिपोर्ट नहीं सौंपी है। पंजाब और हरियाणा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में आते हैं। पांच राज्य-पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और केरल उपभोक्ता राज्य हैं। इनमें से तीन राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार उत्पादक और उपभोक्ता राज्य दोनों की श्रेणी में आते हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इन अन्नागारों का निर्माण 2013-14 में पूरे जोर शोर से चालू हो जाएगा और यह 2014-15 में पूरा हो जाएगा। इनका निर्माण समन्वित मॉडल पर आधारित होगा, जिसमें भारी खरीद, भंडारण और परिवहन से बिचौलिया लागत की बचत होगी और कम से कम चोरी होगी। इन अन्नागारों का निर्माण खाद्य मंत्रालय और भारतीय खाद्य निगम द्वारा विकसित की जा रही 1.5 करोड़ टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता का ही हिस्सा है। (BS Hindi)
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