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05 दिसंबर 2012
निचले स्तर पर फिसला रबर
प्राकृतिक रबर की बेंचमार्क किस्म आरएसएस-4 की कीमतें मंगलवार को 163 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर आ गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में रबर 165 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिका। यह दिलचस्प है क्योंकि पिछले 8 महीने में यह पहला मौका है जब स्थानीय बाजार में रबर की कीमतें वैश्विक बाजार से कम रही। पिछले 8 महीने से स्थानीय कीमतें वैश्विक बाजार के मुकाबले 10-12 रुपये प्रति किलोग्राम ज्यादा होती थी और इसी वजह से प्राकृतिक रबर का आयात तेजी से हो रहा था। एक महीने पहले स्थानीय कीमतें 176 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
स्थानीय बाजार में रबर का स्टॉक भी सबसे ज्यादा है क्योंकि पिछले छह महीने में इसका काफी ज्यादा आयात हुआ है। आयात में इजाफे की वजह वैश्विक बाजार में कीमतों का कम होना था और देश में 1,30,966 टन का आयात हो चुका है और अप्रैल-अक्टूबर के दौरान रबर का आयात मुख्य रूप से टायर विनिर्माताओं ने किया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 99,760 टन रबर का आयात हुआ था। आने वाले दिनों में भी रबर का आयात बढ़ेगा क्योंकि एसएमआर-20 रबर बैंकॉक व क्वालालंपुर के बाजार में सस्ता है। एसएमआर-20 की गुणवत्ता आरएसएस-4 के समान ही है। मंगलवार को क्वालालंपुर के बाजार में एसएमआर की कीमतें 154 रुपये प्रति किलो थी, जबकि आरएसएस-4 की कीमतें भारत में 163 रुपये प्रति किलो रही।
ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में आयात उच्चस्तर पर रहेगा और यह मार्च के आखिर तक 2 लाख टन को पार कर सकता है। वैश्विक बाजार फिलहाल ढलान पर है क्योंकि आर्थिक मंदी के चलते दुनिया भर में इसकी मांग सुस्त है। दुनिया में रबर के सबसे बड़े उपभोक्ता देश चीन में इस साल आयात 15-20 फीसदी कम रहने की संभावना है। ऐसे में वैश्विक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति होगी और इस वित्त वर्ष के बाकी दिनों में बाजार मंदी की गिरफ्त में होगा। रबर की कमी नहीं होगी क्योंकि ज्यादातर उत्पादक देशों के पास ज्यादा माल है। रबर बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अक्टूबर के दौरान 2.45 लाख टन का स्टॉक था।
रबर की आपूर्ति बढ़ रही है क्योंकि टैपिंग का मुख्य सीजन पहले ही शुरू हो चुका है। नवंबर, दिसंबर और जनवरी का मासिक उत्पादन औसतन 1 लाख टन रहने की संभावना है। सभी उत्पादक देशों में जाड़े के दौरान उत्पादन सबसे ज्यादा हो रहा है। कोचीन रबर मर्चेंट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और रबर कारोबारी एन राधाकृष्णन के मुताबिक, रबर का बाजार अगले तीन महीने के लिए मंदी की गिरफ्त में होगा। उन्होंने कहा कि कीमतों में और गिरावट आ सकती है क्योंकि जाड़े के दौरान आपूर्ति और बढ़ेगी। स्टॉक की स्थिति भी अच्छी है क्योंकि उत्पादकों के पास ज्यादा माल है। बाजार में इन स्थितियों में बदलाव अगले गर्मी के सीजन में ही होने की संभावना है, जब टैपिंग का काम धीमा पड़ेगा। (BS Hindi)
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