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22 अगस्त 2012
उत्पादन बढऩे से केसर सस्ता होने के आसार
पिछली पैदावार बेहतर रहने के अलावा नए सीजन में भी ज्यादा उत्पादन संभव
पिछले साल अक्टूबर-नवंबर के फसल कटाई सीजन में कश्मीरी केसर का उत्पादन अच्छा रहने के कारण इसकी कीमतों में गिरावट का रुख है। कारोबारियों का कहना है कि घरेलू बाजार में केसर की आवक का पीक सीजन सितंबर से जनवरी तक होता है। चालू वर्ष में भी अक्टूबर-नवंबर के दौरान नई फसल के बेहतर उत्पादन की संभावना से कीमतों में गिरावट का रुख रह सकता है।
पिछले पांच महीनों में घरेलू बाजार में केसर के थोक भाव घटकर 1,25,000 से 1,30,000 रुपये प्रति किलो (125-130 रुपये प्रति ग्राम) रह गया है। कश्मीर के केसर उत्पादकों के मुताबिक इस साल घाटी में बर्फबारी अच्छी रहने के साथ अनुकूल बारिश के कारण आगामी अक्टूबर-नवंबर के दौरान केसर का उत्पादन अच्छा रहने के आसार हैं। इससे कीमतों में गिरावट जारी रह सकती है।
यूएसएमएस सैफरान कंपनी (बेबी ब्रांड केसर) के निदेशक अवनीश छाबड़ा ने बताया कि कश्मीर में केसर का उत्पादन बेहतर रहने के कारण इसकी कीमतों में गिरावट का रुख है। उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में कश्मीरी केसर का भाव ईरानी केसर के साथ चलता है। ईरान में सालाना करीब 200 टन केसर का उत्पादन होता है।
छाबड़ा ने बताया कि पिछले सीजन में कश्मीर में करीब 10 टन केसर का उत्पादन हुआ है। इस बार भी उत्पादन अच्छा रहने का अनुमान है। सितंबर में केसर की बिक्री का सीजन शुरू होने के बाद 15 सितंबर तक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जम्मू-कश्मीर केसर उत्पादक संघ के अध्यक्ष जी. एम. पोम्पूरी के मुताबिक अक्टूबर-नवंबर 2011 के सीजन में केसर के उत्पादन में बढ़ोतरी व ईरानी केसर की कीमतों में गिरावट के कारण घरेलू बाजार में भाव कम हो रहे हैं।
उन्होंने इस साल घाटी में हुई बर्फबारी के साथ हाल ही में अच्छी बारिश के कारण अगले सीजन (अक्टूबर-नवंबर) में भी केसर का अच्छा उत्पादन बेहतर रहने की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि पिछले साल नवंबर-दिसंबर में बर्फबारी के अलावा जुलाई व अगस्त में होने वाली बारिश से केसर की फसल को काफी फायदा हो रहा है। जम्मू-कश्मीर के करीब 226 गांवों में केसर का उत्पादन किया जाता है। पोम्पूरी व किश्तवाड़ में अत्यधिक मात्रा में केसर का उत्पादन होता है। (BS Hindi)
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