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27 अगस्त 2012
बेहतर बारिश ने दी पैदावार को नई जान
बेहतर हालात
धान, मोटे अनाज, सोयाबीन और गन्ने की फसल को फायदा
गुजरात, कर्नाटक और महराष्ट्र में कम बारिश से मूंगफली और दलहन पर असर
मौसम का साथ रहा तो धान का उत्पादन पिछले साल के स्तर पर
तिलहन और दलहन की फसल पर नकारात्मक असर पडऩे की आशंका
अगस्त महीने में मानसून में हुए सुधार से खरीफ फसलों का उत्पादन अनुमान बढ़ेगा। इस दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में हुई बारिश से धान, मोटे अनाज, सोयाबीन और गन्ने की फसल को ज्यादा फायदा होगा। हालांकि गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में बारिश की कमी का असर मूंगफली और दलहन की फसलों पर पडऩे से इनका उत्पादन घटने की आशंका है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पहली जून से 15 जुलाई के दौरान जहां देशभर में मानसूनी वर्षा सामान्य से 22 फीसदी कम थी वहीं अगस्त में यह घटकर 14 फीसदी रह गई है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता बढऩे से खरीफ फसलों को फायदा हुआ है।
हालांकि गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में मानसूनी वर्षा कम हुई है। गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में सामान्य से 81 फीसदी और गुजरात रीजन में 47 फीसदी, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में 41 फीसदी और उत्तर-पूर्वी कर्नाटक में 37 फीसदी कम बारिश हुई है।
कटक स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने बताया कि धान की रोपाई करीब 75 फीसदी हो चुकी है। हाल ही में हुई बारिश से बचे हुए क्षेत्रफल में भी रोपाई हो जाएगी। किसान 105-110 दिन में पकने वाली फसलों की रोपाई कर रहे हैं। इनके बीज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। लिहाजा पकाई तक मौसम अनुकूल रहा तो चालू खरीफ में चावल का उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर ही हो जाएगी। पिछले साल खरीफ सीजन में 915.3 लाख टन चावल की पैदावार हुई थी।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगस्त महीने में मानसून सुधरा है, जिससे फसलों का उत्पादन अनुमान पहले से बढ़ेगा। हालांकि दलहन और तिलहन की फसलों के उत्पादन में कमी आने की आशंका है। खरीफ में दलहन के प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई जिलों में सूखे जैसे हालात है जबकि राजस्थान में बारिश देर से शुरू हुई है। गुजरात में बारिश की कमी का असर मूंगफली और कपास की फसल पर पड़ेगा।
कृषि मंत्रालय की ओर से जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार दलहन की बुवाई में 11.5 फीसदी की कमी आकर कुल बुवाई 88.30 लाख हेक्टेयर में, मोटे अनाजों की बुवाई में 12.9 फीसदी की कमी आकर 165.34 लाख हेक्टेयर में और धान की रोपाई में 3.7 फीसदी की कमी आकर कुल रोपाई 329.19 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है। तिलहनों की बुवाई में भी 3.3 फीसदी और कपास की बुवाई में 5.2 फीसदी की कमी आई है। (Business Bhaskar....R S Rana)
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