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07 जुलाई 2012
इस साल घटेगा कपास का उत्पादन : आईसीएसी
पिछले दो साल से रिकॉर्ड उत्पादन के बाद देश में कपास का उत्पादन साल 2012-13 में 7 फीसदी घटकर 54 लाख टन रहने की संभावना है। साल 2011-12 में 59 लाख टन कपास का उत्पादन हुआ था। कपास की घटती कीमतों के चलते इसका रकबा 10 फीसदी घटकर 110 लाख हेक्टेयर रह जाएगा। हालांकि घटती कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात में सुधार के कारण देश में कपास का इस्तेमाल साल 2012-13 में 7 फीसदी बढ़कर 47 लाख टन पर पहुंच जाएगा जबकि साल 2011-12 के दौरान इसमें 4 फीसदी की गिरावट आई थी।
अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) के कार्यकारी निदेशक टेरी टाउनसेंड ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया - 'देश से 7.5 लाख टन निर्यात का अनुमान है, जो पिछले सीजन के मुकाबले 61 फीसदी कम है। घटते उत्पादन और देसी मिलों में ज्यादा खपत के साथ-साथ दूसरे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण ऐसा होगा।' उन्होंने कहा कि भारत में साल 2012-13 के दौरान उत्पादन में गिरावट वैश्विक गिरावट (8 फीसदी कम यानी 249 लाख टन) के मुताबिक ही होगी और इसकी वजह वैश्विक स्तर पर कपास की कीमतों में गिरावट है।
कपास उत्पादक व खपत वाले देशों की सरकारों के संगठन आईसीएसी ने अपने अनुमान में कहा है कि चीन के कम खरीद अनुमान के कारण वैश्विक कपास कारोबार 18 फीसदी लुढ़ककर 76 लाख टन रह जाएगा। वैश्विक स्तर पर कपास के भंडार में लगातार इजाफे और कारोबार में गिरावट का असर इसकी कीमतों पर पड़ेगा। साल 2011-12 में कपास के कारोबार में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी और यह 92 लाख टन पर पहुंच गया था, जो साल 2012-13 में 18 फीसदी घटकर 76 लाख टन रह जाने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर 2012-13 के दौरान 249 लाख टन कपास उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले सीजन के मुकाबले 8 फीसदी कम है।
आईसीएसी ने कहा, 'कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी के चलते सूती धागे की मांग पर भी असर पड़ा है। हालांकि कपास की कमी दूर करने के लिए चीन की मिलों ने कपास का काफी आयात किया। चीन सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर भंडार तैयार किया था।' आईसीएसी के मुताबिक मांग में सुधार के चलते कपास का आयात मजबूत होगा, लेकिन यह उतना नहीं है कि चीन की कमी की भरपाई कर दे, क्योंकि चीन के पास काफी स्टॉक है। (BS Hindi)
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