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04 जुलाई 2012
मानसूनी बारिश की कमी से निपटने को पूरी तैयारी
उम्मीदों के सहारे - मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार जुलाई और अगस्त में मानसून अच्छा रहेगा और जून में मानसूनी वर्षा की कमी इन महीनों में पूरी हो जाएगी। हालात उतने खराब नहीं, जितने बताए जा रहे हैं। -शरद पवार, कृषि मंत्री
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि जून में मानसूनी बारिश 31 फीसदी कम रहने के बाद राज्यों को आकस्मिक योजना बनाकर प्रतिकूल हालात से निपटने के लिए कहा गया है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं है क्योंकि जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश होने की संभावना है। पवार ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मानसून के आने में दो सप्ताह की देरी जरूर हुई है लेकिन आगामी दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि देश में अभी सूखे जैसे हालात नहीं है। हालांकि कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात में मोटे अनाजों और मूंगफली की शुरूआती बुवाई पर कुछ असर जरूर पड़ा है। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग के अधिकारियों ने मुझे बताया है कि जुलाई और अगस्त में मानसून अच्छा रहेगा और जून में मानसूनी वर्षा की कमी इन महीनों में पूरी हो जाएगी।
पवार ने कहा कि मानसून में दो सप्ताह की देरी जरूर हुई है लेकिन स्थिति उतनी गंभीर नहीं है, जितनी बताई जा रही है। उम्मीद है अगले सप्ताह में बारिश जोर पकड़ेगी। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और यदि राज्यों की ओर से मांग आई तो सरकार आपूर्ति के लिए तैयार हैं। राज्यों से किसी भी आकस्मिक योजना के निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। आकस्मिक योजना की जरूरत के लिए बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार चालू मानसून सीजन में पहली जून से तीन जुलाई तक देशभर में सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश हुई है। सबसे कम बारिश उत्तर-पश्चिमी भारत में हुई, जहां सामान्य के मुकाबले 71 फीसदी कम बारिश हुई। जबकि मध्य भारत की हालत भी अच्छी नहीं है। यहां अभी तक सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश हुई है।
उधर, दक्षिण भारत में भी पहली जून से पहली जुलाई तक सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि उत्तर पूर्वी भारत में हालात कुछ बेहतर हैं लेकिन यहां भी सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है। कृषि मंत्रालय के बुवाई आंकड़ों के अनुसार 29 जून तक देशभर में धान की बुवाई में 26 फीसदी की कमी आकर कुल बुवाई 30.72 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 41.51 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। (Business Bhaskar....R S Rana)
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