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22 जून 2012
गैर-कृषि जिंसों पर स्पेशल मार्जिन!
जिंस बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने गैर-कृषि जिंसों के लिए स्पेशल मार्जिन या ओपन पोजीशन की सीमा में फेरबदल करने जैसे कदम (मार्केट करेक्शन) उठाने का प्रस्ताव रखा है। फिलहाल इन कदमों का इस्तेमाल कृषि जिंसों के कारोबार में होने वाले उतारचढ़ाव व सटोरिया गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए किया जाता है।
सूत्रों ने कहा, खास तौर से कीमती धातुओं सोना-चांदी और आम धातुओं जैसे तांबे आदि का कारोबार कभी-कभी वास्तविक मांग व आपूर्ति के बजाय सटोरिया कारोबार बन जाता है। एक अधिकारी ने कहा - 'यह सच है कि ज्यादातर कीमती व आम धातुओं की कीमतें वैश्विक बाजार से निर्देशित होती हैं, लेकिन इन धातुओं खास तौर से सोने-चांदी की मांग में भारत का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां तक कि आम धातुओं में भी वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों के मुकाबले भारत का परिदृश्य अभी भी बेहतर है, जो मांग पैदा करता है।'
सूत्रों ने कहा, हालांकि ज्यादातर समय इस बात की चिंता होती है कि जिंस एक्सचेंजों पर वैश्विक कीमतों की आड़ में शायद गैर-कृषि जिंसों में सटोरिया कारोबार को छुपा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सोने-चांदी में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जब वैश्विक कीमतें नरम होती हैं, लेकिन जिंस एक्सचेंजों पर इसकी कीमतें आसमान पर होती हैं। ऐसे वक्त में यह जानकारी आम है कि पिछले साल के आखिर से अब तक कीमती धातुओं की खुदरा मांग में सुस्ती रही है। हालिया निगरानी में कारोबार की मात्रा के लिहाज से ओपन पोजीशन का उच्च अनुपात कीमती धातुओं व आम धातुओं में भी पाया गया है। इस महीने की शुरुआत में एफएमसी ने एक्सचेंजों से कहा था कि इन अनुपातों को वैश्विक मानकों के स्तर पर लाने के लिए वह आयोग के सामने रोडमैप पेश करे। इसके अलावा नियामक ने राष्ट्रीय एक्सचेंजों से कहा है कि वह एक हफ्ते के भीतर 2009-10, 2010-11 और 2011-12 में 15 प्रमुख जिंसों में हुए कारोबार व ओपन इंटरेस्ट के अनुपातों की जानकारी महीनेवार व वर्षवार पेश करे। (BS Hindi)
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