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29 जून 2011
पेट्रो कंपनियों को 58 करोड़ लीटर एथनॉल की सप्लाई होगी
बिजनेस भास्कर नई दिल्ली चीनी मिलें चालू पेराई सीजन में पेट्रेलियम कंपनियों को 58 करोड़ लीटर एथनॉल की सप्लाई करेंगी। पांच फीसदी मिश्रण के हिसाब से पेट्रेलियम कंपनियों को सालाना करीब 92 करोड़ लीटर एथनॉल की आवश्यकता होगी। इस तरह पेट्रोलियम कंपनियों को उनकी आवश्यकता के मुकाबले सिर्फ 63 फीसदी एथनॉल की सप्लाई मिल सकेगी। एथनॉल की सप्लाई राज्यों की नीतियों से भी प्रभावित हो रही है। तमिलनाडु में राज्य सरकार ने एथनॉल के उत्पादन पर रोक लगा रखी है। जबकि उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने अप्रैल से एथनॉल की दूसरे राज्यों को सप्लाई रोक दी है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा ने बताया कि मिलों को चालू पेराई सीजन में 58 करोड़ एथनॉल सप्लाई करने की निविदा प्राप्त हुई हैं। इसमें से करीब 40 फीसदी एथनॉल की सप्लाई हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक पेट्रोल में पांच फीसदी एथनॉल मिलाना अनिवार्य है। सरकार ने पेट्रोल में मिलाने वाले एथनॉल की अंतरिम कीमत 27 रुपये प्रति लीटर तय कर रखी है। पांच फीसदी मिश्रण के आधार पर करीब 92 करोड़ लीटर एथनॉल की सालाना आवश्यकता होगी लेकिन कई राज्यों में सरकारों ने चीनी मिलों को एथनॉल बनाने की अनुमति नहीं दे रखी है। तमिलनाडु में चीनी मिलों को एथनॉल बनाने की अनुमति नहीं है जबकि उत्तर प्रदेश ने अप्रैल से एथनॉल की दूसरे राज्यों में सप्लाई रोक लगा रखी है। ऑल इंडिया डिस्टीलरीज एसोसिएशन के महानिदेशक वी. के. रैना ने बताया कि चालू सीजन में शराब उद्योग की अल्कोहल की मांग बढ़कर 40 करोड़ केसैज (एक कैसेज-चार लीटर) की होने का अनुमान है। शराब बनाने में एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल का उपयोग होता है। करीब 40-45 फीसदी शीरे की खपत शराब कंपनियों में होती है। मवाना शुगर लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू पेराई सीजन में शीरे की उपलब्धता 110 लाख टन होने का अनुमान है। मिलों की शीरा रखने के टैंक भर चुके हैं। चालू सीजन में चीनी मिलें अभी तक छह लाख टन शीरे का निर्यात कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में शीरे का दाम 2,800 से 3,000 रुपये प्रति टन चल रहा है। पिछले साल की तुलना में भाव करीब 1,500 से 2,000 रुपये प्रति टन कम है। एथनॉल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक देसाई ने बताया कि शराब उद्योग में एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) का उपयोग होता है। जबकि पेट्रोलियम कंपनियां 99.9 फीसदी शुद्ध एथनॉल का उपयोग करती है। उधर केमिकल उद्योग में 94.68 फीसदी शुद्ध एथनॉल का उपयोग होता है। (R S Rana)
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