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10 जनवरी 2011
नई फसल की आवक के बावजूद केस्टर सीड में तेजी
निर्यातकों ने केस्टर ऑयल के अग्रिम सौदे ज्यादा मात्रा में कर रखे हैं। इसीलिए प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में केस्टर सीड की नई फसल की आवक शुरू होने के बावजूद कीमतों में तेजी बनी हुई है। हाजिर बाजार में सप्ताह के दौरान इसकी कीमतों में 4.8 फीसदी और वायदा बाजार में 6.6 फीसदी की तेजी आ चुकी है। चालू फसल सीजन में देश में केस्टर सीड का उत्पादन 21.6 फीसदी बढऩे की संभावना तो है लेकिन केस्टर तेल की निर्यात मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केस्टर सीड की मौजूदा कीमतों में फरवरी-मार्च में आवक बढऩे पर पांच-सात फीसदी की गिरावट तो आ सकती है लेकिन भारी गिरावट की संभावना नहीं है। वायदा बाजार में भाव बढ़े नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स) पर निवेशकों की खरीद से सप्ताह भर में ही केस्टर सीड की कीमतों में 4.8 फीसदी की तेजी आ चुकी है। 30 दिसंबर को जनवरी महीने के वायदा अनुबंध में केस्टर सीड का भाव 4,030 रुपये प्रति क्विंटल था जो शुक्रवार को बढ़कर 4,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। जनवरी महीने के वायदा अनुबंध में केस्टर सीड में 4,660 लॉट के सौदे खड़े हुए हैं। एंजेल ब्रोकिंग के एग्री कमोडिटी विश£ेषक बदरुदीन ने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में नवंबर महीने में बारिश होने से फसल लेट हो गई है जबकि निर्यातकों ने केस्टर ऑयल के अग्रिम सौदे ज्यादा मात्रा में कर रखे हैं। इसीलिए आवक बढऩे के बावजूद कीमतों में तेजी बनी हुई है। चालू महीने के आखिर तक उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड की आवक तो बढ़ेगी लेकिन कीमतों में गिरावट की संभावना फरवरी-मार्च महीने में बनने की संभावना है। पैदावार में बढ़ोतरी का अनुमान साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार वर्ष 2010-11 में केस्टर सीड का उत्पादन बढ़कर 11.80 लाख टन होने का अनुमान है जबकि वर्ष 2009-10 में इसका उत्पादन 9.7 लाख टन का ही हुआ था। वर्ष 2009-10 में 4.4 लाख टन तेल की उपलब्धता हुई थी जबकि वर्ष 2010-11 में 5.31 लाख टन तेल की उपलब्धता होने की संभावना है। केस्टर तेल का निर्यात बढ़ा एस. सी. केमिकल के मैनेजिंग डायरेक्टर कुशल राज पारिख ने बताया कि वर्ष 2010 में जनवरी से दिसंबर तक केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 3.75 लाख टन होने का अनुमान है जबकि वर्ष 2009 में इसका निर्यात 2.90 लाख टन का हुआ ही था। चीन और यूरोपीय देशों की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए वर्ष 2011 में केस्टर तेल के निर्यात में और भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। चीन के आयातक इस समय 1875 से 1925 डॉलर प्रति टन की दर से आयात सौदे कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि केस्टर तेल की घरेलू खपत भी बढ़कर 1.25 से 1.50 लाख टन की हो गई है जबकि ऑटो उद्योग की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ष 2011 में मांग में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। चालू महीने के आखिर तक बढ़ेगी आवक जयंत एग्रो ऑर्नामिक लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर वामन भाई ने बताया कि गुजरात की मंडियों में केस्टर सीड की दैनिक आवक बढ़कर 25 हजार बोरी (एक बोरी-75 किलो) की हो गई है। चालू महीने के आखिर तक आवक बढ़कर एक लाख बोरी की हो जायेगी। इस समय संयंत्रों के पास स्टॉक नहीं है जबकि संयंत्र ने तेल के अग्रिम सौदे कर लिए थे। वैसे भी प्रतिकूल मौसम के कारण फसल करीब महीना भर लेट हो गई है इसीलिए भाव बढ़ रहे हैं। सीड और तेल की कीमतें तेज मेहसाना के थोक कारोबारी रौनक भाई ने बताया कि आवक के मुकाबले प्लांटों की मांग ज्यादा होने के कारण केस्टर सीड और तेल की कीमतें बढ़ी है। शुक्रवार को केस्टर सीड के भाव बढ़कर 4,250-4,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गया जबकि इस दौरान केस्टर तेल का भाव बढ़कर 925-930 रुपये प्रति दस किलो हो गया। प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में फसल लेट हो गई है जबकि आंध्रप्रदेश में आवक लगभग समाप्त हो गई है। फरवरी-मार्च में आवक बढऩे पर मौजूदा कीमतों में पांच से सात फीसदी की गिरावट आने की संभावना है लेकिन भारी गिरावट की संभावना नहीं है। (Buisness Bhaskar....R S Rana)
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