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02 नवंबर 2010
सरसों की बंपर पैदावार होने की संभावना
प्रमुख उत्पादक राज्यों में अनुकूल मौसम से चालू रबी सीजन में सरसों का उत्पादन बढ़कर 85 लाख टन होने का अनुमान है। कृषि आयुक्त डॉ. गुरबचन सिंह ने बताया कि सितंबर महीने में हुई बारिश से सरसों और चने की बुवाई तो बढ़ी है, साथ में प्रति हैक्टेयर उत्पादन भी ज्यादा होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009-10 में देश में सरसों का उत्पादन 64.13 लाख टन और चने का 73.5 लाख टन का उत्पादन हुआ था। जबकि चालू रबी में चने का उत्पादन भी बढ़कर तय लक्ष्य 75.8 लाख टन होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में चने और सरसों के बुवाई क्षेत्रफल में भारी बढ़ोतरी हुई है। सरसों और चने का ज्यादातर उत्पादन असिंचित क्षेत्रों में होता है। सितंबर महीने में आखिर तक इन राज्यों में बारिश हुई है। इसीलिए सरसों और चने के उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी की संभावना है।सरकार ने वर्ष 2010-11 में देश में 165 लाख टन दलहन के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। अनुकूल मौसम और बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी को देखते हुए उत्पादन तय लक्ष्य से भी ज्यादा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं की बुवाई शुरू हो चुकी है।चालू सप्ताह में प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी बुवाई शुरू हो जाएगी। नवंबर के अखिर तक देश में गेहूं की कुल बुवाई 65-70 फीसदी पूरी होने का अनुमान है। नवंबर महीना गेहूं की बुवाई के लिए उपयुक्त समय है तथा इस समय मौसम भी बुवाई के एकदम अनुकूल है। हालांकि गेहूं की बुवाई का कार्य दिसंबर के आखिर तक भी चलता है। लेकिन दिसंबर में बुवाई करने पर प्रति हैक्टेयर उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है। वर्ष 2009-10 में देश में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन 807 लाख टन का हुआ था जबकि उत्पादन का लक्ष्य 820 लाख टन का रखा गया था। लेकिन पकाई के समय फरवरी-मार्च में प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम ज्यादा गर्म होने से गेहूं का प्रति हैक्टेयर उत्पादन प्रभावित हुआ था। उन्होंने कहा कि कुछेक जगहों को छोड़कर बीज और खाद की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा है। तथा जिन क्षेत्रों में कमी है वहां भी उपलब्धता कराई जा रही है। (Business Bhaskar....R S Rana)
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