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22 सितंबर 2010
हर तरफ बाढ़ का पानी
यमुना से गांवों को खतरा टल नहीं रहा है। 38 दिन में 5वीं बार यमुना ने उफान लिया है। इससे एक बार फिर करीब दस गांवों को लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। खेत व सड़क सब पानी में एक से दिख रहे हैैं। रविवार को करीब 7.44 लाख क्यूसिक पानी हथनी कुंड से छोड़े जाने के बाद हर कोई डरा हुआ है।यमुना नदी के साथ लगते गांव हंसू माजरा, चौगावां, चंद्राव, गढ़पुर टापू, नबीवाद, जपती छप्परा, सैय्यद छप्परा, कमालपुर, गढ़रियान, नागल माडल व डबकौली खुर्द आदि गांव बरसात के पानी के घिरे हैैं। इन गांवों के निचले इलाके में बनी कालोनियों में पानी भर गया है। सड़के पानी बह जाने व डूबी होने से यातायात व्यवस्था ठप है। भूखे मवेशी मरने की कगार पर हैैं। इन गांवों के लोगों व पशुओं की बीमारी की मार झेलनी पड़ रही है। वैसे कुछ स्वास्थ्य टीमें बनाई गई हैं पर बाढ़ और मरीजों की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैैं। हालात ये हैैं कि मौके पर किश्तियां तो पड़ी हैैं पर इन्हें चलाने वाला कोई नहीं है।वैसे प्रशासन पूरे इंतजाम होने का दावा कर रहा है। एसडीएम दिनेश यादव का दावा है कि पूरे क्षेत्र को चार जोनों में बांटकर तहसीलदार, कानूनगो, बीडीपीओ, एससीपीओ, एसएचओ की ड्यूटी लगाई गई है। आपात स्थित से निपटने के लिए करीब दस हजार मिïट्टी के कट्टे, जेसीबी व नहरी विभाग को तैयार रहने को कहा गया है।मेहनत पर फिर गया पानीयमुनी नदी के किनारे बसे गांवों के किसान कृपाल सिंह, राजकुमार, अमरीक सिंह, मोहनलाल, हरभजन सिंह, राजपाल, बलविंद्र, संजीव, राजपाल, संजय कुमार, गुरदयाल, दर्शन सिंह आद ने आरोप है कि प्रशान उनकी जान-माल की रक्षा करने के स्थान पर तटबंध की सुरक्षा में लगा है। उनकी कोई सुध नहीं ली जा रही। आदमी व पशु सब बेहाल हैैं। बार-बार की बाढ़ में उनकी फसल चौपट हो गई है। उनकी सारी मेहनत बर्बाद हो गई है। डीसी ने लिया बाढ़ प्रबंधन का जायजा : करनाल & डीसी नीलम प्रदीप कासनी ने जिला के बाढग़्रस्त गांवों का दौरा किया और लोगों को आश्वस्त किया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। प्रशासन हर मुश्किल में आपके साथ है। डीसी ने मुस्तफाबाद, नबीयाबाद सहित अन्य गांवों का दौरा कर बाढ़ प्रबंधन का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और कहा कि वे संयम रखें। (Dainik Bhaskar)
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