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04 सितंबर 2010
कॉटन निर्यात कोटा 55 लाख गांठ तय
अगले एक अक्टूबर से शुरू हो रहे नए सीजन वर्ष के दौरान सरकार देश से 55 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) कॉटन निर्यात की अनुमति देगी। इस मात्रा के बाद कॉटन निर्यात करने पर 2500 रुपये प्रति टन निर्यात शुल्क लगेगा। अगले सीजन में देश में 330 लाख गांठ का रिकॉर्ड कपास उत्पादन होने की संभावना है। चालू सितंबर में समाप्त हो रहे सीजन वर्ष 2009-10 में 292 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था।एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर, टैक्सटाइल सचिव रीता मेनन और कृषि सचिव पी. के. बसु के बीच हुई बैठक में 55 लाख कॉटन निर्यात का कोटा तय किया गया। निर्यातकों को कॉटन निर्यात के अपने सौदे पूर्व व्यवस्था के अनुसार टैक्सटाइल कमिश्नर के ऑफिस में पंजीकृत कराने होंगे। अगले सीजन में कॉटन निर्यात के सौदे 15 सितंबर से पंजीकृत किए जाएंगे।अगले सीजन में कॉटन की घरेलू खपत 220 लाख गांठ रहने का अनुमान हैं। घरेलू खबर और निर्यात के बाद देश में सीजन की समाप्ति पर बकाया स्टॉक 50-55 लाख गांठ के बीच रहने का अनुमान है। पिछले सीजन में देश से 83 लाख गांठ कॉटन का निर्यात किया गया और सीजन की समाप्ति पर 40.5 लाख गांठ कॉटन का स्टॉक बचने का अनुमान है। कॉटन के जबर्दस्त निर्यात होने की मुख्य वजर विदेश में तेजी आना रहा। पिछले अक्टूबर 2009 से मई के दौरान 2010 के दौरान विश्व बाजार में कॉटन के दाम करीब 35 फीसदी बढ़ गए। वाणिज्य सचिव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि निर्धारित कोटा के बाद कॉटन का निर्यात करने पर टैक्स लगेगा। टैक्स और दूसरे प्रतिबंध अप्रैल और मई के दौरान लगाए गए थे ताकि घरेलू बाजार में कॉटन के बढ़ते मूल्य पर नियंत्रण लगाया जा सके। कॉटन निर्यात पर 2500 रुपये प्रति टन टैक्स लगाने के अलावा नए निर्यात सौदे पंजीकरण करने पर रोक लगा दी गई थी।बात पते कीनए सीजन में कॉटन की घरेलू खपत 220 लाख गांठ रहने का अनुमान हैं। सीजन की समाप्ति पर बकाया स्टॉक 50-55 लाख गांठ रह सकती है। (Business Bhaskar)
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