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23 अगस्त 2010
किसानों को नई कपास के बेहतर मूल्य
पाकिस्तान और चीन में बाढ़ से कॉटन की फसल को नुकसान हुआ है जिससे घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है। संभावना है कि करीब डेढ़ माह बाद नई फसल आएगी, उस समय किसानों को उनकी कपास के बेहतर मूल्य मिलें। हालांकि आवक का दबाव शुरू होने पर मूल्य में कुछ गिरावट भी आ सकती है। पिछले एक महीने में घरेलू बाजार में कॉटन के दाम करीब 13.5 फीसदी और विदेशी बाजार में करीब 10.54 फीसदी बढ़ चुके हैं। उधर सरकार ने सितंबर से कॉटन निर्यात के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू करने और अक्टूबर से निर्यात की अनुमति देने के संकेत दिए हैं।कॉटन एडवायजरी बोर्ड (सीएबी) के अनुसार मौजूदा मार्केटिंग वर्ष 2009-10 में देश में कॉटन का उत्पादन 295 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) का हुआ है। जबकि पिछले साल की समाप्ति के समय करीब 71.50 लाख गांठ का बकाया स्टॉक बचा था। इसके अलावा करीब 7 लाख गांठ का आयात हुआ। ऐसे में कुल उपलब्धता 373.50 लाख गांठ की बैठती है। इसमें से चालू सीजन में करीब 83 लाख गांठ का निर्यात होने का अनुमान है जबकि देश में कॉटन की सालाना खपत करीब 250 लाख गांठ की होती है। इसलिए वर्ष 2010-11 में शुरू होने वाले नए सीजन के समय देश में कॉटन का 40.50 लाख गांठ का स्टॉक बचने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार चालू सीजन में कॉटन की बुवाई में करीब 10.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। अभी तक देश में 105.67 लाख हैक्टेयर में कॉटन की बुवाई हो चुकी है जो पिछले साल की समान अवधि 95.59 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। अभी तक मौसम फसल के अनुकूल रहा है ऐसे में देश में कॉटन की पैदावार में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। सरकार ने नए सीजन में कॉटन निर्यात पर लगी रोक हटा सकती है। पाकिस्तान और चीन में बाढ़ से जरूर कॉटन का उत्पादन प्रभावित होगा, लेकिन अगर पूरे विश्व में कॉटन के कुल उत्पादन में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। भारत में भी इसके उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी की संभावना है। साथ ही नई फसल के समय बकाया स्टॉक भी अच्छी मात्रा में बचेगा, हालांकि बकाया स्टॉक पिछले साल से कम होगा। लेकिन सितंबर मध्य के बाद कॉटन की कीमतों में गिरावट शुरू होने की संभावना है। अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म की कॉटन का दाम बढ़कर शनिवार को 33,000 से 33,500 रुपये प्रति कैंडी (प्रति कैंडी 356 किलो) हो गया। मालूम हो कि 21 जुलाई को इसका भाव 29,200 से 29,500 रुपये प्रति कैंडी था। हालांकि कीमतों में तेजी आने से मांग पहले की तुलना में कम हो गई है। उधर, न्यूयार्क बोर्ड ऑफ ट्रेड में दिसंबर वायदा अनुबंध की कीमतों में पिछले एक महीने में 10.54 फीसदी की तेजी आकर भाव 83.55 सेंट प्रति पाउंड हो गए।बात पते कीकिसानों को नई कपास के बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है क्योंकि नए सीजन की शुरूआत में 40 लाख गांठ पिछला स्टॉक बचने का अनुमान है, जो पिछले साल से कम है। (BS Hindi)
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