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06 जुलाई 2010
गरीबों को खाद्य तेल और दाल परोसेगी सरकार
नई दिल्लीः केंद्र सरकार समाज के वंचित वर्ग और गरीबों को दिए जाने वाले सब्सिडाइज्ड खाद्य पदार्थों का दायरा बढ़ाना चाहती है। गरीबों को पूर्ण पोषण मुहैया कराने के लिए सरकार सब्सिडाइज्ड खाद्य पदार्थों के दायरे में खाद्य तेल, चीनी और दाल को भी जोड़ना चाहती है। फिलहाल, सरकार सब्सिडाइज्ड दरों पर गेहूं और चावल ही मुहैया करा रही है। नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल की 24 जुलाई को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की उम्मीद है। यह काउंसिल राज्यों के मुख्यमंत्रियों की संस्था है और इसके चेयरमैन प्रधानमंत्री हैं। सब्सिडाइज्ड खाद्य पदार्थों का दायरा बढ़ाने का विचार राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ने पेश किया है। एनएसी की चेयरमैन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'केंद्र सरकार गरीबों के लिए सब्सिडाइज्ड खाद्य पदार्थों का दायरा बढ़ाना चाहती है। सरकार इसमें दाल और खाद्य तेल जोड़ना चाहती है।' मंत्रियों के एक समूह ने सलाह दी थी कि नए खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्रत्येक गरीब परिवार को हर महीने 3 रुपए किलो के हिसाब से 25 किलोग्राम अनाज दिया जाए। अनाज की इस मात्रा को 35 किलो तक बढ़ाने की बात कही गई है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हर परिवार को अभी इतना ही अनाज दिया जा रहा है। इसके अलावा केंद सरकार सभी परिवारों के लिए खाद्य पदार्थों की प्राइसिंग अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर करना चाहती है, जिसमें गरीब परिवार को स्मार्ट कार्ड के जरिए सीधे सब्सिडी मुहैया कराई जाएगी। अधिकारी ने बताया, 'गरीबी रेखा से नीचे गुजारा कर रहे लोगों को स्मार्ट कार्ड के जरिए सब्सिडी दी जाएगी। इससे सब्सिडाइज्ड खाद्य पदार्थों की चोरी पर रोक लगेगी।' राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर इस बात से सहमत हैं कि खाद्य तेल और दालों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का जरूरी हिस्सा बनाना चाहिए, लेकिन गरीब परिवारों को स्मार्ट कार्ड से सीधे नकद सब्सिडी मुहैया कराने को लेकर मंदर संशय की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, 'यह पूरी तरह से इस परिकल्पना पर आधारित है कि गरीब लोगों के पास पहले अनाज खरीदने के लिए पैसा होना चाहिए और जब वे अनाज खरीद लेंगे तो उन्हें उसकी अदायगी मिलेगी।' उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था अभी भ्रष्टाचार मुक्त कैश ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं है। फिर से गठित की गई एनएसी की दूसरी बैठक में 1 जुलाई को मंदर और एम एस स्वामीनाथन ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में देश की पूरी आबादी को इसके दायरे में लाने की जरूरत पर जोर दिया था। एनएसी ने प्रस्ताव रखा गया है कि खाद्य सुरक्षा कानून में उम्रदराज, बीमार, असहाय, शारीरिक रूप से विकलांग, बेघर बच्चों, टीबी, एचआईवी एड्स और कुष्ठ जैसी बीमारियों से पीडि़त लोगों को खासतौर से शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा एनएसी ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) आधारित वितरण व्यवस्था को और दुरुस्त करने की बात भी कही है। मंदर ने कहा, 'मुझे लगता है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली तो केवल एक हिस्सा है। अहम बात है कि हमें समाज के गरीब लोगों को कम्युनिटी किचेन और आईसीडीएस (इंटरग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज) जैसे कार्यक्रमों के जरिए भुखमरी से बचाना होगा।' उन्होंने सामाजिक और व्यावसायिक रूप से कमजोर वर्गों पर ध्यान देने की बात कही, क्योंकि इससे आदिवासियों, विधवाओं, अक्षम लोगों और बेघर शहरी लोगों की पहचान करना आसान हो जाएगा। (ई टी हिंदी)
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