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15 जून 2010
चीनी आयात शुल्क पर फैसला टला
सरकार चीनी पर आयात शुल्क लगाने के बार में तत्काल कोई फैसला नहीं करगी, बल्कि फिलहाल बाजार की स्थिति का आंकलन करेगी। कृषि मंत्री शरद पवार ने यहां पत्रकारों को बताया कि विश्व में पिछले कुछ दिनों में चीनी के दाम बढ़े हैं। ऐसे में चीनी के आयात पर शुल्क लगाने से घरलू बाजार में भी इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया अगले 15-20 दिन बाद फिर से स्थिति की समीक्षा के बाद ही आयात पर शुल्क लगाना है या नहीं, इस पर विचार किया जाएगा। उद्योग लंबे समय से व्हाइट शुगर के आयात पर शुल्क लगाने की मांग कर रहा है। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्हाइट चीनी का दाम बढ़कर 500 डॉलर प्रति टन से ज्यादा हो गया है जबकि चालू महीने के शुरू में भाव 485 डॉलर प्रति टन था। चीनी का दाम जनवरी महीने में फुटकर में बढ़कर 48-50 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था जबकि इस समय भाव 30-33 रुपये प्रति किलो है। कीमतों में आई गिरावट के कारण ही उद्योग आयातित चीनी पर शुल्क लगाने की मांग कर रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) की बैठक में लेवी चीनी की मात्रा को 20 फीसदी से घटाकर 16 फीसदी करने पर विचार किया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरण के लिए केंद्र सरकार मिलों से 20 फीसदी चीनी लेवी के रूप लेती है। उन्होंने बताया कि चीनी का उत्पादन बढ़कर 187 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पेराई सीजन के शुरू में उत्पादन अनुमान 160 लाख टन का था। लेवी चीनी की कीमतों के बार में उन्होंने बताया कि इसकी कीमतें 17-18 रुपये प्रति किलो के हिसाब से तय किए जाने की संभावना है।घरलू चीनी मिलें लेवी चीनी के मूल्य वृद्धि, इसकी मात्रा में कमी, आयात शुल्क लगाने और स्टॉक लिमिट संबंधी बाधाएं हटाने जैसी कई मांगों के लिए सरकार पर दबाव डाल रही है। सरकार सभी मांगों पर विचार कर रही हैं लेकिन उन पर धीर-धीर ही फैसला कर रही है ताकि बाजार में चीनी के मूल्य में अनायास बढ़ोतरी न होने लगे। (बिज़नस भास्कर....आर अस राणा)
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