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28 जून 2010
कमोडिटी ट्रैकर
गर्मी ज्यादा पड़ने से स्टॉक में रखे प्याज को नुकसान हो रहा है। इस समय घरलू और निर्यातकों की मांग भी अच्छी निकल रही है। मई में प्याज का निर्यात 34।8 फीसदी बढ़ा है। जुलाई-अगस्त में निर्यात मांग में और बढ़ोतरी की संभावना है। ऐसे में इस दौरान इसकी कीमतों में 150-200 रुपये प्रति `िंटल की तेजी आने की संभावना है। चालू सीजन में देश में प्याज का कुल उत्पादन बढ़कर 95 लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले साल के 85 लाख टन से ज्यादा है। लेकिन मौसम ज्यादा गर्म होने के कारण राजस्थान और मध्य प्रदेश में प्याज को नुकसान हुआ है। मई के मुकाबले जून में निर्यात बढ़ा है। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास फाउंडेशन (एनएचआरडीएफ) के अनुसार अप्रैल में प्याज का निर्यात 106,891 टन हुआ था जोमई में बढ़कर 144,109 टन हो गया। जुलाई-अगस्त में निर्यात मांग में और भी इजाफा होने की संभावना है। हालांकि निर्यात में बढ़ोतरी प्याज के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) पर निर्भर करगी। इस समय प्याज का एमईपी 200-205 डॉलर प्रति टन है तथा नेफेड हर महीने घरलू बाजार में प्याज की उपलब्धता की समीक्षा के आधार पर एमईपी तय करती है। भारत से प्याज का सबसे ज्यादा निर्यात बांग्लादेश, सिंगापुर, मलेशिया और खाड़ी देशों को होता है। वित्त वर्ष 2009-10 में देश से प्याज का निर्यात बढ़कर 18.14 लाख टन का हुआ था जबकि वित्त वर्ष 2008-09 में कुल निर्यात 17.83 लाख टन का हुआ था। चालू वित्त वर्ष में निर्यात में और बढ़ोतरी की संभावना है। इस समय उत्पादक मंडियों में प्याज की आवक कम हो गई है। दिल्ली में प्याज की दैनिक आवक करीब 85-90 मोटरों की हो रही है। इसमें 90 फीसदी माल राजस्थान और मध्य प्रदेश से आ रहा है। राजस्थान में गर्मी से प्याज को ज्यादा नुकसान हुआ है वैसे भी जुलाई के बाद राजस्थान से आवक कम हो जाएगी। हालांकि जुलाई में महाराष्ट्र से आवक बढ़ जाएगी। लेकिन चूंकि ज्यादातर माल स्टॉकिस्टों के पास हैं तथा महाराष्ट्र से दिल्ली का भाड़ा राजस्थान और मध्य प्रदेश से ज्यादा है। इसीलिए स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम आने से प्याज की मौजूदा कीमतों में तेजी की संभावना है। दिल्ली में राजस्थान के प्याज का भाव 300 से 600 रुपये और मध्य प्रदेश के प्याज का भाव 800 से 1000 रुपये प्रति `िंटल है। उधर महाराष्ट्र के नासिक में प्याज का भाव 400 से 600 रुपये प्रति `िंटल चल रहा है। जुलाई-अगस्त में घरलू और निर्यातकों की मांग से इसकी कीमतों में करीब 150-200 रुपये प्रति `िंटल की तेजी आने की संभावना है। हालांकि कर्नाटक में अगस्त-सितंबर में आने वाली फसल का उत्पादन कैसा रहता है इस पर भी तेजी-मंदी निर्भर करेगी। आंध्र प्रदेश के करनूल में भी प्याज की आवक जुलाई में बन जाएगी लेकिन इसकी खपत वहीं हो जाती है। इसलिए इसका असर दिल्ली में प्याज की कीमतों में नहीं पड़ता है। rana@businessbhaskar.netबात पते कीदिल्ली में प्याज की दैनिक आवक करीब 85-90 मोटरों की हो रही है। इसमें 90 फीसदी माल राजस्थान और मध्य प्रदेश से आ रहा है। राजस्थान में गर्मी से प्याज को ज्यादा नुकसान हुआ है वैसे भी जुलाई के बाद राजस्थान से आवक कम हो जाएगी। (बिज़नस भास्कर....आर अस राणा)
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