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23 जून 2010
सस्ते अनाज से महंगाई पर लगेगी लगाम
दिनों-दिन बढ़ती महंगाई पर लगाम कसने के लिए सरकार बाजार में सस्ते भावों पर गेहूं व चावल मुहैया कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए चालू वित्त वर्ष की जुलाई के बाद की शेष अवधि के लिए खुले बाजार में बिक्री की नई स्कीम (ओएमएसएस) लाने पर विचार हो रहा है। स्कीम के तहत खुले बाजार में बिक्री के लिए केंद्रीय पूल से 50 लाख टन गेहूं व चावल बाजार भाव से काफी कम दाम पर उपलब्ध कराया जाएगा। योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए बिक्री के नियमों को भी सरल बनाया जाएगा।खाद्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक नई ओएमएसएस योजना को अंतिम रूप खाद्यान्न स्टॉक और मानसून की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दिया जाएगा। हालांकि मौजूदा ओएमएसएस योजना का लक्ष्य भी खाद्य क्षेत्र की महंगाई दर को नियंत्रण में रखने में मदद देना ही है, लेकिन नई स्कीम को ज्यादा प्रभावी नतीजे हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया जाएगा। इसके लिए नई स्कीम में गेहूं व चावल का दाम बाजार भाव से तो कम रखा ही जाएगा, यह मौजूदा ओएमएसएस की तुलना में भी कम होगा। साथ ही योजना को सफल बनाने के लिए बिक्री की प्रक्रिया को भी खासा सरल बनाया जाएगा। खुले बाजार में बिक्री की मौजूदा योजना के तहत केंद्र राज्य सरकारों को गेहूं व चावल उपलब्ध कराता है, जिसे बाद में खुदरा विक्रेताओं को बेचा जाता है। इसके अलावा आटा मिलों जैसे बड़े उपभोक्ताओं के लिए टेंडर जारी किए जाते हैं। लेकिन राज्य सरकारों ने अभी तक ज्यादा गेहूं व चावल नहीं लिया है। जबकि बड़े उपभोक्ताओं के लिए सरकार को दामों में 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की कमी करनी पड़ी थी। इसके बावजूद मिलों ने अभी तक केवल 12 लाख टन गेहूं की ही खरीद की है।द केंद्रीय पूल में 1 अप्रैल, 2010 को 428 लाख टन गेहूं व चावल था। जबकि बफर के लिए सिर्फ 212 लाख टन की जरूरत होती है। मौजूदा ओएमएसएस के तहत केंद्र ने 20 लाख टन गेहूं व 10 लाख टन चावल राज्यों को अक्तूबर, 2009 से मार्च, 2010 के बीच बिक्री के लिए जारी किया था। बाद में गेहूं का उत्पादन न करने वाले राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर व दिल्ली के लिए गेहूं बिक्री योजना को जून तक बढ़ा दिया गया था। जबकि चावल के आवंटन की योजना को सभी राज्यों के लिए 30 जून तक बढ़ा दिया गया था। इसके अलावा केंद्र ने बड़े उपभोक्ताओं के लिए 208 लाख टन के गेहूं के टेंडर जारी किए थे। लेकिन उन्होंने केवल 12 लाख टन की खरीद की, इसलिए इसकी अवधि को भी सितंबर, 2010 तक बढ़ा दिया गया है। मौजूदा समय में खुदरा विक्रेताओं को सरकार लुधियाना से किराया व न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक्री करती है। जबकि बड़े उपभोक्ताओं को किराए में खरीद की पूरी लागत मिलाकर बिक्री की जाती है। गेहूं का एमएसपी फिलहाल 1100 रुपये व धान की सामान्य प्रजाति का खरीद मूल्य 1,000 रुपये प्रति क्विंटल है।क्या है तैयारीनई स्कीम को ज्यादा प्रभावी नतीजे हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया जाएगा। इसके लिए नई स्कीम में गेहूं व चावल का दाम बाजार भाव से तो कम रखा ही जाएगा, यह मौजूदा ओएमएसएस की तुलना में भी कम होगा। साथ ही योजना को सफल बनाने के लिए बिक्री की प्रक्रिया को भी खासा सरल बनाया जाएगा। (बिज़नस भास्कर)
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