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31 मार्च 2010
अगले महीनों में जीर के दाम और बढ़ने की संभावना
निर्यातकों की मांग बढ़ने से पिछले पंद्रह दिनों में जीर के दाम करीब पांच फीसदी बढ़ गए हैं। ऊंझा में जीरे के भाव बढ़कर 10,800-11,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस दौरान कीमतों में 100 डॉलर की तेजी आकर भाव 2300-2350 डॉलर प्रति टन हो गए। टर्की और सीरिया में नई फसल की आवक जून-जुलाई में बनेगी। ऐसे में आगामी दो महीने तक कीमतें तेज ही बनी रहने की संभावना है। मुंबई स्थित मैसर्स जैब्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरक्टर भास्कर शाह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय जीर के दाम बढ़कर 2300-2350 डॉलर, टर्की के जीर का भाव 2500-2550 और सीरिया के जीर का भाव 2400-2450 डॉलर प्रति टन हो गए। टर्की और सीरिया में नई फसल की आवक जून-जुलाई में बनेगी तथा इन देशों के पास बकाया स्टॉक भी कम है। ऐसे में आगामी दो महीने में भारत से निर्यात मांग बराबर बनी रहेगी। इसलिए घरलू बाजार में भी दाम तेज ही बने रहने की संभावना है। मैसर्स हनुमान प्रसाद पीयूष कुमार के प्रोपराइटर वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि चालू फसल सीजन में देश में जीर का उत्पादन पिछले साल के 28 लाख बोरी (प्रति बोरी 55 किलो) के बराबर ही बैठने की संभावना है। ऊंझा मंडी में चालू महीने में दैनिक आवक औसतन करीब 25 हजार बोरियों की बनी हुई थी लेकिन चालू मार्च के बाकी दो दिन खाताबंदी के लिए मंडी में अवकाश रहेगा। मंडी दो अप्रैल तक बंद रहेगी। अप्रैल-मई में निर्यातकों के साथ स्टॉकिस्टों की मांग अच्छी रहने के आसार हैं। गुजरात की मंडियों में अभी तक करीब सात-आठ लाख बोरी जीर का स्टॉक हो चुका है। जबकि राजस्थान की मंडियों में भी करीब डेढ़ से दो लाख बोरी जीर का स्टॉक हो चुका है। जीरा व्यापारी कुनाल शाह ने बताया कि मंडी में जीर के दाम बढ़कर 2160-2200 रुपये प्रति 20 किलो हो गए हैं। हालांकि वायदा बाजार में पिछले एक सप्ताह में मुनाफावसूली आने से कीमतों में 4।1 फीसदी का मंदा आया है। 23 मार्च को मई वायदा अनुबंध के दाम 12,426 रुपये प्रति क्विंटल हो थे जो सोमवार को घटकर 11,913 रुपये प्रति `िंटल रह गए। अगले महीनों की निर्यात संभावनाओं के विपरीत चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान भारत से जीर के निर्यात में 10.4 फीसदी की कमी आई है। इस दौरान कुल निर्यात घटकर 40,600 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 45,350 टन जीर का निर्यात हुआ था। टर्की और सीरिया में बकाया स्टॉक कम होने और भारत के मुकाबले इन देशों का भाव उंचा होने के कारण अप्रैल-मई में भारतीय जीर की निर्यात मांग बराबर बनी रहने की संभावना है। (बिसनेस भास्कर....आर अस राणा)
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