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06 मार्च 2010
मोनसेंटो ने मानी बीटी कॉटन में बीमारी की बात
देश में पहली आनुवांशिकीय परिवर्तित (जीएम) कपास की किस्म बीटी कॉटन बेचने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी मोनसेंटो और इसकी भारतीय सहयोगी कंपनी म्हाइको ने स्वीकार किया है कि गुजरात के चार जिलों में बीटी कॉटन में पिंक बालवार्म बीमारी पाई गई। यह किस्म इस बीमारी से लड़ने में नाकाम रही है। कंपनी द्वारा शुक्रवार को जारी वक्तव्य में कहा गया है कि मोनसेंटो और म्हाइको के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि बॉलगार्ड नाम से बाजार में सबसे पहले लांच की गई बीटी कपास अब पिंक बालवार्म (अमेरिकन सूंडी) के लिए बेअसर साबित हो रही है। गुजरात के चार जिलों अमरली, भावनगर, जूनागढ़ और राजकोट में किये गये अध्ययन में पाया गया कि बॉलगार्ड में मौजूद सीआरवाई1एसी जीन (वंशाणु) के खिलाफ पिंक बॉलवार्म में प्रतिरोधिता आ गई है जिस कारण बॉलगार्ड किस्म बेअसर हो रही है। कंपनी का दावा है कि इन जिलों को छोड़कर कहीं भी बालगार्ड काटन के विफल होने की सूचना अभी तक नहीं है। कंपनी का कहना है कि यह जानकारी जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रूवल कमेटी (जीईएसी) को दे दी गई है। हालांकि कंपनी ने पाया है कि दो जीन सीआरवाई1सी और सीआरवाई2एबी से तैयार बॉलगार्ड 2 के खिलाफ कीटों में कोई प्रतिरोधिता नहीं देखी गई है। कंपनी का कहना है कि इंसेक्ट रसिस्टेंट की मॉनिटरिंग करने के लिए विशेषज्ञों का एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। जीईएसी ने इसके लिए सीआईसीआर के निदेशक के नेतृत्व में टीम गठित करने का निर्देश दिया है। यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर मॉनिटरिंग का काम करने के साथ ही किसानों को जरूरी जानकारी भी मुहैया कराएगा। बॉलगार्ड 2 को 2006 में व्यावसायिक उत्पादन के लिए जारी किया गया था। मोनसेंटों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में बीटी कपास लगाएं उसके आसपास के करीब 20 फीसदी क्षेत्र में पारंपरिक किस्म जरूर लगाएं। कंपनी का कहना है कि बीटी के खिलाफ कीटों में प्रतिरोधिता विकसित होना प्राकृतिक है और इसीलिए अब करीब 80 फीसदी कपास किसान बॉलगार्ड 2 को लगा रहे हैं। (बिज़नस भास्कर)
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