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19 मार्च 2010
महंगी चीनी का दोष मीडिया पर मढ़ा पवार ने
आम उपभोक्ताओं के लिए पिछले करीब एक साल से कड़वा स्वाद दे रही चीनी पर खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने उत्पादन की अटकलों वाले बार-बार बयान देकर तेजी को बढ़ावा दिया। लेकिन अब वे चीनी की तेजी के लिए मीडिया पर दोष मढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि राज्यों के कृषि आयुक्तों ने चीनी उत्पादन के आंकड़ें कम दर्शाए जो गलत थे। मीडिया ने भी इन्हीं आंकड़ों को खूब प्रचारित किया, जिससे चीनी के मूल्य में अनावश्यक तेजी आई। पवार ने चीनी के बढ़े दामों पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि चीनी उत्पादन 140-150 लाख टन तक रहने के अनुमान जताए गए जबकि असल में उत्पादन 168 लाख टन से कुछ अधिक रहने की संभावना है। कृषि मंत्री के मुताबिक चीनी का उत्पादन इससे भी अधिक रह सकता है। उत्पादन बढ़ने की संभावना से चीनी के दामों में कमी आने लगी है। पवार ने यहां तक कह दिया कि मीडिया के गैर जिम्मेदाराना रवैये से आम आदमी को नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि मंत्री पिछले चीनी सीजन के दौरान दिए गए अपने बयान भूल गए है, जिनमें उन्होंने चीनी उत्पादन का अनुमान बार-बार बदला और इन बयानों से चीनी की तेजी में बल मिला। पवार ने खाद्यान्न उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज के भंडारण में आ रही परशानियों के मुद्दे पर कहा कि अधिक से अधिक गोदामों को किराए पर लिया जा रहा है। भंडारण के लिए बेकार पड़ी फैक्ट्रियों में भी खाद्यान्न रखने का इंतजाम किया जा रहा है। पवार ने माना कि खाद्यान्न भंडारण गंभीर समस्या बनी हुई है।खरीफ फसल अभियान-2010 पर आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगले वर्ष भंडारण और किसानों को मिलने वाली संभावित कीमत को लेकर वे अभी से परशान हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले खरीफ मौसम के लिए सभी राज्यों को बेहतर कृषि सेवा किसानों को सुलभ कराने के लिए कहा गया है। पवार ने कहा कि बजट में कृषि के लिए दी गई राशि का किसानों को पूरा लाभ मिले, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। (बिज़नस भास्कर)
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